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Aatish Indori
jal
jal | जल्दी बौरा जाता हूँ
- Aatish Indori
जल्दी
बौरा
जाता
हूँ
अक्सर
धोका
खाता
हूँ
तू
तो
पहली
चाहत
थी
गीत
तेरे
ही
गाता
हूँ
रस्ता
कैसे
पाऊँगा
ख़ुद
में
जंगल
पाता
हूँ
पहली
बारिश
पहली
है
अब
तक
भीगा
जाता
हूँ
- Aatish Indori
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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इसे
तो
वक़्त
की
आब-ओ-हवा
ही
ठीक
कर
देगी
मियाँ
नासूर
होते
ज़ख़्म
सहलाया
नहीं
करते
shaan manral
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ऊपर
उठती
हुई
एक
गर्म
हवा
है
मिरा
दर्द
मेरा
लहजा
कभी
फ़रियाद
नहीं
हो
सकता
Farhat Ehsaas
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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ये
हवा
सारे
चराग़ों
को
उड़ा
ले
जाएगी
रात
ढलने
तक
यहाँ
सब
कुछ
धुआँ
हो
जाएगा
Naseer Turabi
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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जहाँ
सारे
हवा
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
वहाँ
भी
हम
दिया
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
Abbas Qamar
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याद
आ
जाती
है
और
रात
बिगड़
जाती
है
बनने
वाली
थी
जो
वो
बात
बिगड़
जाती
है
याद
रखना
कि
बुरा
होता
है
मुँह-फट
होना
ज़िंदगी
भर
के
लिए
बात
बिगड़
जाती
है
सोचते
यह
हैं
कि
ता-उम्र
रहेंगे
मिल
के
वक़्त
के
साथ
मगर
बात
बिगड़
जाती
है
यह
कोई
पहली
दफ़ा
थोड़ी
हुआ
है
जानाँ
हर
दफ़ा
मेरी
बनी
बात
बिगड़
जाती
है
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Aatish Indori
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महज़
'आशिक़
है
दीवाने
नहीं
हैं
वे
जो
मय-ख़ाने
में
बैठे
हैं
जो
दीवाने
हैं
वे
माशूक़
की
बाँहों
में
वीराने
में
बैठे
हैं
Aatish Indori
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कब
मैं
यारों
शराब
पीता
हूँ
मैं
तो
जन्नत
का
आब
पीता
हूँ
Aatish Indori
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राह
जब
भी
तवील
हो
जाए
हर
क़दम
एक
मील
हो
जाए
लटके
रहना
सलीब
पर
तय
है
ज़िन्दगी
जब
वकील
हो
जाए
ख़ुशनुमा
ख़्वाब
आएगा
तय
हो
दिन
कभी
जब
तवील
हो
जाए
एक
मुद्दत
से
आस
है
‘आतिश’इश्क़
उसको
भी
फ़ील
हो
जाए
हौसला
गर
जवाँ
रहे
‘आतिश’
उम्र
फिर
तो
तवील
हो
जाए
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Aatish Indori
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हम
निभाते
कहाँ
हैं
ढोते
हैं
सूतकों
पर
ही
फ़ोन
होते
हैं
Aatish Indori
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