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Aatish Indori
ghaav se raad kyun nahin aati
ghaav se raad kyun nahin aati | घाव से राद क्यूँँ नहीं आती
- Aatish Indori
घाव
से
राद
क्यूँँ
नहीं
आती
आपकी
याद
क्यूँँ
नहीं
आती
शा'इरी
तो
वही
सुनाता
हूँ
आपकी
दाद
क्यूँँ
नहीं
आती
अब
तो
ख़्वाबों
में
भी
नहीं
आते
इतनी
भी
याद
क्यूँँ
नहीं
आती
देखने
लोग
आते
हैं
माना
उतनी
तादाद
क्यूँँ
नहीं
आती
- Aatish Indori
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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रोने
को
तो
ज़िंदगी
पड़ी
है
कुछ
तेरे
सितम
पे
मुस्कुरा
लें
Firaq Gorakhpuri
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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मैं
चोट
कर
तो
रहा
हूँ
हवा
के
माथे
पर
मज़ा
तो
जब
था
कि
कोई
निशान
भी
पड़ता
Abhishek shukla
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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जानता
था
कि
तुम
दग़ा
दोगी
क्यूँँकि
तुम
कहती
थी
वफ़ा
दोगी
आपकी
तरह
ही
हसीन
है
वो
अपना
काजल
उसे
लगा
दोगी
एक
झटके
मैं
झुक
गई
तुम
तो
और
तुम
मुझको
हौसला
दोगी
उम्र
भर
आपको
दु'आ
दूँगा
अच्छे
ग़म-ख़्वार
का
पता
दोगी
जिस्म
तक
इसलिए
नहीं
पहुँचा
ज़िंदगी
भर
मुझे
दु'आ
दोगी
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ख़ुद
को
तू
ख़ुद
ही
तंग
मत
करना
बद-ख़यालों
से
जंग
मत
करना
धन
बढ़ाने
का
देता
हूँ
मंतर
कभी
भी
हाथ
तंग
मत
करना
तुम
बड़प्पन
में
घर
गँवा
बैठे
कहा
किसने
था
जंग
मत
करना
घर
में
रह
लो
मगर
निवेदन
है
बाद
में
हमको
तंग
मत
करना
सिर्फ़
रोटी
चुराई
है
साहब
इसलिए
अंग-भंग
मत
करना
नाम
लेकर
उतार
दी
फिर
से
रंग
में
फिर
से
भंग
मत
करना
बाद
मुद्दत
मैं
मुस्कुराया
हूँ
एक
दो
दिन
तो
तंग
मत
करना
मिलना-जुलना
ही
बंद
हो
जाए
रास्ता
इतना
तंग
मत
करना
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रूठने
से
फ़ायदा
तो
है
नहीं
दिल
का
रिश्ता
टूटना
तो
है
नहीं
आपसे
कुछ
कहने
से
क्या
फ़ायदा
कोई
सोता
फूटना
तो
है
नहीं
आप
पीले
रंग
की
पहनाओगे
बेड़ियों
को
टूटना
तो
है
नहीं
यह
ही
अच्छा
है
कि
रिश्ते
में
रहो
बंधनों
से
छूटना
तो
है
नहीं
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मेरा
सागर
ख़यालों
का
किधर
जाता
है
समझो
मेरे
चेहरे
पे
वो
चेहरा
उभर
आता
है
समझो
किसी
का
बे-वफ़ा
होने
का
मंसूबा
नहीं
था
मुहब्बत
का
चढ़ा
दरिया
उतर
जाता
है
समझो
तुम्हारे
कंधे
पर
कुछ
दिन
से
तितली
बैठती
है
मुहब्बत
हो
गई
है
यह
नज़र
आता
है
समझो
परिंदों
को
बताने
की
ज़रूरत
भी
नहीं
है
परिंदा
ख़ुद
बुलंदी
से
उतर
आता
है
समझो
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ज़रूरत
है
तभी
तक
हमनवाई
है
मुहब्बत
का
मुक़द्दर
बेवफ़ाई
है
करो
वा'दा
कि
अंतिम
बेवफ़ाई
है
तुम्हें
जानाँ
मुहब्बत
की
दुहाई
है
किसी
ओर
का
वगरना
वो
नहीं
होता
इसी
कारण
की
मैंने
बेवफ़ाई
है
करो
वो
काम
जिस
सेे
डरते
हो
आतिश
अकेली
इक
यही
डर
की
दवाई
है
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