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Aamir Ali
koii aisi tadbeer kheencho
koii aisi tadbeer kheencho | कोई ऐसी तदबीर खींचो
- Aamir Ali
कोई
ऐसी
तदबीर
खींचो
मुसव्विर
हो
तस्वीर
खींचो
नया
एक
नक़्शा
बनाओ
नया
एक
कश्मीर
खींचो
यूँँ
ढाया
करो
ज़ुल्म
मुझ
पर
मैं
कहता
हूँ
ज़ंजीर
खींचो
सियासत
है
कैसी
गुलों
में
जो
कहते
हैं
शमशीर
खींचो
चलो
आख़िरी
खेल
खेलें
मेरी
ओर
तुम
तीर
खींचो
- Aamir Ali
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वो
हमारा
ग़म
चुरा
कर
ले
गया
साथ
अपने
ले
गया
तस्वीर
भी
Meem Alif Shaz
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मेरे
कमरे
में
उदासी
है
क़यामत
की
मगर
एक
तस्वीर
पुरानी
सी
हँसा
करती
है
Abbas Qamar
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अपने
जैसी
कोई
तस्वीर
बनानी
थी
मुझे
मिरे
अंदर
से
सभी
रंग
तुम्हारे
निकले
Salim Saleem
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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बस
तेरी
तस्वीर
ही
इक
पास
थी
उस
में
भी
तू
बेख़बर
सोई
हुई
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S M Afzal Imam
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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भेज
देता
हूँ
मगर
पहले
बता
दूँ
तुझ
को
मुझ
से
मिलता
नहीं
कोई
मिरी
तस्वीर
के
बाद
Umair Najmi
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जब
आँखों
में
लगाता
हूँ
तो
चुपके-चुपके
हंस-हंसकर
तेरी
तस्वीर
भी
कहती
है,
सूरत
ऐसी
होती
है
Dagh Dehlvi
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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शब-ए-ग़म
में
हैं
राज़
कितने
पिरोए
यूँँ
अल्फ़ाज़
कितने
उठा
रेशमी
लाल
पर्दा
दिखाई
पड़े
साज़
कितने
वफ़ा
महज़
बातें
रही
है
वफ़ादार
हमराज़
कितने
ये
काँटे
ये
पत्थर
ये
ख़ंजर
हैं
अपनों
से
नाराज़
कितने
हैं
कुछ
दाग़
उस
चाँद
पर
जो
सुख़न-वर
भी
लफ़्फ़ाज़
कितने
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Aamir Ali
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रहो
तुम
भी
यूँँ
जैसे
ग़म
रहा
है
मोहब्बत
का
यही
आलम
रहा
है
यहाँ
खिलता
नहीं
है
फूल
कोई
यहाँ
मौसम
भी
बे-मौसम
रहा
है
तुम्हें
क्या
याद
है
वो
पल
हमारे
यही
शिकवा
मुझे
हर
दम
रहा
है
ये
काग़ज़
पे
बिखरते
लफ़्ज़
देखो
पिघलते
अश्क
में
ख़ूँ
जम
रहा
है
कहीं
कोई
मेरे
जैसा
भी
'आमिर'
ख़ुदा
की
क़ैद
में
आदम
रहा
है
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Aamir Ali
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किसे
बे-ख़बर
ढूँढता
है
इधर
हूँ
उधर
ढूँढता
है
वो
मुझ
से
मिला
कुछ
यूँँ
जैसे
बयाबाँ
बसर
ढूँढता
है
नए
शहर
में
हर
मुसाफ़िर
किराए
का
घर
ढूँढता
है
नज़र
से
नज़र
तो
मिली
पर
निशाना
जिगर
ढूँढता
है
सफ़र
पर
जो
निकले
तो
पाया
सफ़र
हम
सेफ़र
ढूँढता
है
वो
साक़ी
तो
हाज़िर
है
हर-दम
ये
मय-कश
पहर
ढूँढता
है
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Aamir Ali
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नज़र
में
अदा
हो
हया
से
भरी
हो
ख़मोशी
भी
तेरी
सदास
भरी
हो
समुंदर
है
लहरें
बला
से
भरी
हो
कशिश
में
हवाएँ
वबास
भरी
हो
न
कोई
मुरव्वत
न
कोई
रिआयत
ये
क्या
ज़िंदगी
बद-दुआ
से
भरी
हो
ज़माना
बदलता
रहा
है
मगर
तुम
सुना
है
कि
अब
भी
अना
से
भरी
हो
मुझे
और
कुछ
भी
नहीं
चाहिए
बस
मेरी
जेब
तेरी
वफ़ा
से
भरी
हो
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Aamir Ali
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तआरुफ़
है
दर-पेश
आमिर
बता
दो
मैं
शाइर
नहीं
हूँ
Aamir Ali
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