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Aamir Ali
ta'aruf hai dar-pesh aamir
ta'aruf hai dar-pesh aamir | तआरुफ़ है दर-पेश आमिर
- Aamir Ali
तआरुफ़
है
दर-पेश
आमिर
बता
दो
मैं
शाइर
नहीं
हूँ
- Aamir Ali
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मत
कहो
अब
ख़ाक
हूँ
मैं
गर्द
हूँ
नूर
का
क़तरा
हूँ
थोड़ा
ज़र्द
हूँ
ज़ुल्म
तेरे
सब
समझता
हूँ
मगर
घर
के
ज़िम्मेदार
सा
इक
फ़र्द
हूँ
जाम-ए-इशरत
कौन
समझा
है
तुझे
देख
लो
मैं
आज
कूचा-गर्द
हूँ
ख़ुश
समुंदर
आप
आया
लौट
कर
जैसे
मैं
साहिल
तेरा
हमदर्द
हूँ
कौन
पहरा
दे
रहा
आमिर
मुझे
कोई
पर्दे
में
हूँ
या
बेपर्द
हूँ
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Aamir Ali
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यहाँ
से
वहाँ
हो
गए
हम
फ़ुलाँ
थे
फ़ुलाँ
हो
गए
हम
क़दम
दो
क़दम
चलते
चलते
कोई
कारवाँ
हो
गए
हम
गुमाँ
है
हमें
होने
का
तो
बड़े
बद-गुमाँ
हो
गए
हम
खिला
है
नया
फूल
जब
से
बशर
बाग़बाँ
हो
गए
हम
पढ़ी
आयत-ए-इश्क़
तुम
ने
यहाँ
तर्जुमाँ
हो
गए
हम
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Aamir Ali
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जब
क़ुर्बतों
को
फ़िक्र
ज़माने
की
खा
गई
तन्हाई
कैफ़ियत
है
सनम
बाब
इश्क़
है
Aamir Ali
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नज़र
में
अदा
हो
हया
से
भरी
हो
ख़मोशी
भी
तेरी
सदास
भरी
हो
समुंदर
है
लहरें
बला
से
भरी
हो
कशिश
में
हवाएँ
वबास
भरी
हो
न
कोई
मुरव्वत
न
कोई
रिआयत
ये
क्या
ज़िंदगी
बद-दुआ
से
भरी
हो
ज़माना
बदलता
रहा
है
मगर
तुम
सुना
है
कि
अब
भी
अना
से
भरी
हो
मुझे
और
कुछ
भी
नहीं
चाहिए
बस
मेरी
जेब
तेरी
वफ़ा
से
भरी
हो
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Aamir Ali
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वफ़ा
की
नज़र
ढूँढता
हूँ
अदा
में
असर
ढूँढता
हूँ
किसी
से
नहीं
राब्ता
जब
किसे
दर-ब-दर
ढूँढता
हूँ
जहाँ
से
निकाला
गया
मैं
वहीं
फिर
बसर
ढूँढता
हूँ
अदम
से
बने
इस
सफ़र
में
कहाँ
बाम-ओ-दर
ढूँढता
हूँ
सुनो
मय-कदे
से
निकल
कर
मैं
घर
रात-भर
ढूँढता
हूँ
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Aamir Ali
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