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Aamir Ali
gilaa hai na shikwa hai koii
gilaa hai na shikwa hai koii | गिला है न शिकवा है कोई
- Aamir Ali
गिला
है
न
शिकवा
है
कोई
रक़ीबों
में
अपना
है
कोई
वो
आला
या
अदना
है
कोई
वो
दावा-ए-तक़्वा
है
कोई
वो
आवाज़
देता
नहीं
अब
मुझे
यूँँ
भी
रखता
है
कोई
ये
दामन
अगर
तुम
हटा
दो
तो
जाने
कि
सपना
है
कोई
नया
साल
आने
को
है
अब
तेरी
राह
तकता
है
कोई
ये
ज़ुल्म-ओ-सितम
क्या
है
आमिर
यूँँ
वहशत
भी
लिखता
है
कोई
- Aamir Ali
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काश
वो
रास्ते
में
मिल
जाए
मुझ
को
मुँह
फेर
कर
गुज़रना
है
Fahmi Badayuni
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मैं
किस
से
पूछूँ
ये
रस्ता
दुरुस्त
है
कि
ग़लत
जहाँ
से
कोई
गुज़रता
नहीं
वहाँ
हूँ
मैं
Umair Najmi
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बात
करने
का
हसीं
तौर-तरीक़ा
सीखा
हम
ने
उर्दू
के
बहाने
से
सलीक़ा
सीखा
Manish Shukla
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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मेरी
जानिब
न
बढ़ना
अब
मोहब्बत
मैं
अब
पहले
से
मुश्किल
रास्ता
हूँ
Liaqat Jafri
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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चाँद
का
फिर
मेरा
रस्ता
देखती
आँखें
तुम्हारी
आज
करवाचौथ
के
दिन
काश
हम
तुम
साथ
होते
Gaurav Singh
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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दीवार
क्या
गिरी
मिरे
ख़स्ता
मकान
की
लोगों
ने
मेरे
सेहन
में
रस्ते
बना
लिए
Sibt Ali Saba
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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मुझे
क्या
मुराद-ए-वुजूद-ओ-अदम
फ़साना
यहाँ
का
यहीं
रह
गया
Aamir Ali
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रहो
तुम
भी
यूँँ
जैसे
ग़म
रहा
है
मोहब्बत
का
यही
आलम
रहा
है
यहाँ
खिलता
नहीं
है
फूल
कोई
यहाँ
मौसम
भी
बे-मौसम
रहा
है
तुम्हें
क्या
याद
है
वो
पल
हमारे
यही
शिकवा
मुझे
हर
दम
रहा
है
ये
काग़ज़
पे
बिखरते
लफ़्ज़
देखो
पिघलते
अश्क
में
ख़ूँ
जम
रहा
है
कहीं
कोई
मेरे
जैसा
भी
'आमिर'
ख़ुदा
की
क़ैद
में
आदम
रहा
है
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Aamir Ali
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मत
कहो
अब
ख़ाक
हूँ
मैं
गर्द
हूँ
नूर
का
क़तरा
हूँ
थोड़ा
ज़र्द
हूँ
ज़ुल्म
तेरे
सब
समझता
हूँ
मगर
घर
के
ज़िम्मेदार
सा
इक
फ़र्द
हूँ
जाम-ए-इशरत
कौन
समझा
है
तुझे
देख
लो
मैं
आज
कूचा-गर्द
हूँ
ख़ुश
समुंदर
आप
आया
लौट
कर
जैसे
मैं
साहिल
तेरा
हमदर्द
हूँ
कौन
पहरा
दे
रहा
आमिर
मुझे
कोई
पर्दे
में
हूँ
या
बेपर्द
हूँ
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Aamir Ali
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वफ़ा
की
नज़र
ढूँढता
हूँ
अदा
में
असर
ढूँढता
हूँ
किसी
से
नहीं
राब्ता
जब
किसे
दर-ब-दर
ढूँढता
हूँ
जहाँ
से
निकाला
गया
मैं
वहीं
फिर
बसर
ढूँढता
हूँ
अदम
से
बने
इस
सफ़र
में
कहाँ
बाम-ओ-दर
ढूँढता
हूँ
सुनो
मय-कदे
से
निकल
कर
मैं
घर
रात-भर
ढूँढता
हूँ
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Aamir Ali
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तआरुफ़
है
दर-पेश
आमिर
बता
दो
मैं
शाइर
नहीं
हूँ
Aamir Ali
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