ye aur baat door rahe manzilon se ham | ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम

  - Aalok Shrivastav
येऔरबातदूररहेमंज़िलोंसेहम
बचकरचलेहमेशामगरक़ाफ़िलोंसेहम
होनेकोफिरशिकारनईउलझनोंसेहम
मिलतेहैंरोज़अपनेकईदोस्तोंसेहम
बरसोंफ़रेबखातेरहेदूसरोंसेहम
अपनीसमझमेंआएबड़ीमुश्किलोंसेहम
मंज़िलकीहैतलबतोहमेंसाथलेचलो
वाक़िफ़हैंख़ूबराहकीबारीकियोंसेहम
जिनकेपरोंपेसुब्हकीख़ुशबूकेरंगहैं
बचपनउधारलाएहैंउनतितलियोंसेहम
कुछतोहमारेबीचकभीदूरियाँभीहों
तंगगएहैंरोज़कीनज़दीकियोंसेहम
गुज़रेंहमारेघरकीकिसीरहगुज़रसेवो
पर्देहटाएँदेखेंउन्हेंखिड़कियोंसेहम
जबभीकहाकियादहमारीकहाँउन्हें
पकड़ेगएहैंठीकतभीहिचकियोंसेहम
  - Aalok Shrivastav
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