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Shubham Rai 'shubh'
likha tha naam dil pe jo mitaana chahta hooñ
likha tha naam dil pe jo mitaana chahta hooñ | लिखा था नाम दिल पे जो मिटाना चाहता हूँ
- Shubham Rai 'shubh'
लिखा
था
नाम
दिल
पे
जो
मिटाना
चाहता
हूँ
कि
तेरे
साथ
गुज़रा
पल
भुलाना
चाहता
हूँ
न
मुझको
ढूँढ़
दलदल
में
ज़माने
के
ओ
साथी
मुसाफ़िर
हूँ
जो
बस
इक
आशियाना
चाहता
हूँ
- Shubham Rai 'shubh'
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तुम्हारी
राह
में
मिट्टी
के
घर
नहीं
आते
इसलिए
तो
तुम्हें
हम
नज़र
नहीं
आते
Waseem Barelvi
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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उस
ने
सारी
दुनिया
माँगी
मैंने
उस
को
माँगा
है
उस
के
सपने
एक
तरफ़
हैं
मेरा
सपना
एक
तरफ़
Varun Anand
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
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Alankrat Srivastava
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ये
ऐसा
क़र्ज़
है
जो
मैं
अदा
कर
ही
नहीं
सकता
मैं
जब
तक
घर
न
लौटूँ
मेरी
माँ
सज्दे
में
रहती
है
Munawwar Rana
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नापता
हूँ
मैं
ख़यालात
की
गहराई
को
कौन
समझेगा
मेरी
बात
की
गहराई
को
Charagh Sharma
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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इश्क़
हुआ
है
क्या
तुझ
को
भी
तेरा
जो
होगा
सो
होगा
shaan manral
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मैं
कहता
हूँ
"सुनो
लड़की!
मुझे
कुछ
तुम
से
कहना
था"
वो
ऐसे
पूछती
है
फिर
मैं
सब
कुछ
भूल
जाता
हूँ
Shadab Asghar
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आदमी
की
नस्ल
को
हम
दूर
से
पहचानते
हैं
हाथ
किस
का
है
कहाँ
पे
यार
हम
सब
जानते
हैं
Shubham Rai 'shubh'
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किसी
हद
से
गुज़रना
चाहता
हूँ
तुम्हें
छू
कर
बिखरना
चाहता
हूँ
किसी
दिन
पर्दे
से
मुझको
निहारो
मैं
अब
सजना
सँवरना
चाहता
हूँ
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Shubham Rai 'shubh'
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कि
दर्द-ए-सुख़न
गुनगुनाते
हुए
ज़रा
ठहरा
तुझको
सुनाते
हुए
सभी
पीर
समझे
मिरा
इसलिए
तुझे
गाया
है
बुदबुदाते
हुए
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Shubham Rai 'shubh'
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इक
सदी
की
त्रास
हो
तुम
इक
सदी
की
कल्पना
एक
कवि
का
प्रेम
हो
तुम
एक
कवि
की
वेदना
जीत
कर
प्रभु
युद्ध
को
हर
ली
सिया
की
यातना
किन्तु
लंका
से
है
रघुवर
को
बहुत
संवेदना
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Shubham Rai 'shubh'
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आँखों
में
तू
सैलाब
आने
दे
आज
उस
प्रेयसी
को
भी
भुलाने
दे
आज
सब
सेे
तबीअत
से
मिलूँगा
ऐ
दोस्त
थोड़ी
ख़ुशी
उनको
मनाने
दे
आज
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Shubham Rai 'shubh'
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