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Shubham Rai 'shubh'
jaise qismat aazmaana hota haius tarah ab dil lagana hota hai
jaise qismat aazmaana hota haius tarah ab dil lagana hota hai | जैसे क़िस्मत आज़माना होता है
- Shubham Rai 'shubh'
जैसे
क़िस्मत
आज़माना
होता
है
उस
तरह
अब
दिल
लगाना
होता
है
ये
खुले
गेसू
नशीली
आँखें
बस
और
क्या
दिल
हार
जाना
होता
है
- Shubham Rai 'shubh'
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अभी
जंग
जारी
है
हारा
नहीं
हूँ
कि
हथियार
अपना
उतारा
नहीं
हूँ
ज़मीं
है
ये
मेरी
न
ललकारो
मुझ
को
सुनामी
हूँ
मैं
कोई
धारा
नहीं
हूँ
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बुरा
हो
वक़्त
तो
इंसान
भी
ख़ामोश
हो
जाता
सही
से
ज़िंदगी
का
अर्थ
तो
तकलीफ़
समझाता
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करूँँगा
मैं
क्या
अब
बताता
नहीं
हूँ
सो
अब
पीठ
पर
ज़ख़्म
खाता
नहीं
हूँ
सभी
लूट
जाए
भले
आज
कल
पर
किसी
दर
पे
मैं
सर
झुकाता
नहीं
हूँ
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मोहब्बत
से
निकलना
जो
कभी
तो
देखना
तुम
किताब-ए-ज़ीस्त
के
पन्नों
में
लिक्खा
क्या
गया
था
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सवाल
क्या
है
जवाब
क्या
है
खुले
न
आँखें
तो
ख़्वाब
क्या
है
ज़बाँ
सही
है
अगर
तुम्हारी
तू
ही
बता
फिर
ख़राब
क्या
है
मिटेंगे
हम
तो
मिटोगे
तुम
भी
या
पूछ
राह-ए-सवाब
क्या
है
सफ़र
में
जिनके
भरे
हों
काँटें
जा
पूछ
उन
सेे
गुलाब
क्या
है
मिले
जो
इज़्ज़त
बिना
ख़रीदे
तो
इस
सेे
ज़्यादा
निसाब
क्या
है
रहे
सलामत
जो
दोस्ताना
बड़ा
जहाँ
में
ख़िताब
क्या
है
रहे
ये
जीवन
जो
निष्कलंकित
तो
इस
सेे
बढ़िया
किताब
क्या
है
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