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Shubham Rai 'shubh'
aise mehfil men ja jaakar ke main kya paata hooñ
aise mehfil men ja jaakar ke main kya paata hooñ | ऐसे महफ़िल में जा जाकर के मैं क्या पाता हूँ
- Shubham Rai 'shubh'
ऐसे
महफ़िल
में
जा
जाकर
के
मैं
क्या
पाता
हूँ
हँसते
सूरत
की
ख़मोशी
मैं
चुरा
लाता
हूँ
- Shubham Rai 'shubh'
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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बात
करनी
मुझे
मुश्किल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
जैसी
अब
है
तेरी
महफ़िल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
Bahadur Shah Zafar
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मुझे
अँधेरे
से
बात
करनी
है
सो
करा
दो,
दिया
बुझा
दो
कुछ
एक
लम्हों
को
रौशनी
का
गला
दबा
दो,
दिया
बुझा
दो
रिवाज़-ए-महफ़िल
निभा
रहा
हूँ
बता
रहा
हूँ
मैं
जा
रहा
हूँ
मुझे
विदा
दो,
जो
रोना
चाहे
उन्हें
बुला
दो,
दिया
बुझा
दो
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Vikram Gaur Vairagi
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दर्द
की
बात
किसी
हँसती
हुई
महफ़िल
में
जैसे
कह
दे
किसी
तुर्बत
पे
लतीफ़ा
कोई
Ahmad Rahi
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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समुंदर
में
भी
सहरा
देखना
है
मुझे
महफ़िल
में
तन्हा
देख
लेना
Aqib khan
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बिछती
नहीं
पलकें
जहाँ
अपना
तुम्हारा
होता
है
इच्छाएँ
जब
जब
बढ़ती
हैं
तब
तब
ख़सारा
होता
है
Shubham Rai 'shubh'
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वक़्त-बे-वक़्त
उसको
बुलाया
नहीं
शख़्स
जो
साथ
मेरा
निभाया
नहीं
साथ
उसके
बिना
हम
चले
थे
मगर
रास्ते
ने
भी
मुझको
गिराया
नहीं
जिस
ज़माने
से
डरते
रहे
उम्र
भर
उस
ज़माने
ने
अपना
बनाया
नहीं
वो
भी
इल्ज़ाम
मुझपे
लगाते
रहे
इक
घड़ी
साथ
जिसने
बिताया
नहीं
तीर
इतने
सहे
तंज़
के
दोस्तों
वक़्त
आया
तो
हमने
चलाया
नहीं
हार
मिलती
अगर,सब
सुनाते
मुझे
जीत
पर
कोई
मुझको
सराहा
नहीं
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Shubham Rai 'shubh'
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अभी
तक
जो
न
बदला
आज
बदलेगा
समय
के
साथ
अपना
ताज
बदलेगा
युवा
पीढ़ी
अभी
क़ाबिल
निपुण
भी
है
कभी
इस
देश
का
आमाज
बदलेगा
दबाते
जा
रहे
जो
हक
गरीबों
का
कभी
इक
रोज़
तो
आवाज़
बदलेगा
अभी
थक
हार
कर
बैठो
न
तुम
तो
शुभ
बताओ
किस
तरह
सरताज
बदलेगा
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Shubham Rai 'shubh'
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दिन
फिरे
हैं
तो
मिलने
आए
हो
ये
मोहब्बत
मैं
सब
समझता
हूँ
तीरगी
में
न
साथ
था
कोई
भीड़
क्यूँँ
है
ये
अब
समझता
हूँ
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Shubham Rai 'shubh'
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बदलते
वक़्त
का
हिस्सा
हूँ
मैं
कि
स्क्वायर
फ़ुट
हो
तुम
बिस्वा
हूँ
मैं
Shubham Rai 'shubh'
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