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Rahul
jabse usne apne saare dhang badle
jabse usne apne saare dhang badle | जबसे उसने अपने सारे ढंग बदले
- Rahul
जबसे
उसने
अपने
सारे
ढंग
बदले
तबसे
मेरे
कमरे
के
भी
रंग
बदले
इक
नज़र
के
साए
में
आए
मिरे
पग
फिर
मिरे
पग
उस
नज़र
के
संग
बदले
मुझ
सेे
लड़कर
रब
से
बोला
उसने
या
रब
रब
कभी
ना
इश्क़
की
ये
जंग
बदले
- Rahul
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हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
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लग
गई
मुझको
नज़र
बेशक़
तुम्हारी
आईनों
मैं
बहुत
ख़ुश
था
किसी
इक
सिलसिले
से
उन
दिनों
Aarush Sarkaar
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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जिस
की
जानिब
'अदा'
नज़र
न
उठी
हाल
उस
का
भी
मेरे
हाल
सा
था
Ada Jafarey
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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हमें
दीदार
से
मरहूम
रखकर
है
नज़र
दिल
पर
पराया
माल
ताको
और
दौलत
अपनी
रहने
दो
Dagh Dehlvi
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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ऐसा
पहले
तो
नहीं
होता
था
मैं
कभी
ग़म
में
नहीं
सोता
था
इस
तरह
जीना
सिखाया
सबने
शीशे
के
सामने
ही
रोता
था
कुछ
ख़तों
में
ये
लिखा
लड़के
ने
जो
नहीं
चाहे
वही
होता
था
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Rahul
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इतने
दिन
बाद
आई
हो
मतलब
आज
तक
तुमको
याद
भी
था
मैं
Rahul
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आ
जो
गया
हूँ
तुम्हारी
गली
में
आके
मुझे
तुम
गले
से
लगा
लो
Rahul
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तुम
कितना
अच्छा
गाती
हो
फिर
नाम
से
बुलाती
हो
अनपढ़
सा
बच्चा
हूँ
सुनो
तुम
बच्चों
को
पढ़ाती
हो
इक
राह
तक
रहा
हूँ
मैं
कितना
समय
लगाती
हो
सब
ख़्वाब
भूल
जाता
हूँ
तुम
सुब्ह
जब
जगाती
हो
ये
किसका
ग़ुस्सा
है
जो
तुम
बातें
मुझे
सुनाती
हो
अब
याद
भी
नहीं
हो
तुम
अब
याद
भी
न
आती
हो
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Rahul
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सबकी
आँखों
में
हवस
है
उसकी
आँखों
में
हया
है
Rahul
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