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Sabir Hussain
shor-o-gul maazi ke apne yaad karke
shor-o-gul maazi ke apne yaad karke | शोर-ओ-गुल माज़ी के अपने याद करके
- Sabir Hussain
शोर-ओ-गुल
माज़ी
के
अपने
याद
करके
तन्हा
बूढ़ा
घर
बिलख
कर
रो
रहा
है
- Sabir Hussain
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ज़रा
सी
देर
आँखों
में
चली
जाए
तुम्हारी
याद
बहुत
दिन
हो
गए
दिल
का
मुझे
झाड़ू
लगाना
है
Tanoj Dadhich
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तुम
से
छुट
कर
भी
तुम्हें
भूलना
आसान
न
था
तुम
को
ही
याद
किया
तुम
को
भुलाने
के
लिए
Nida Fazli
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फिर
उसी
सितमगर
को
याद
कर
रहे
हैं
हम
यानी
बे-वजह
ग़म
ईजाद
कर
रहे
हैं
हम
Harsh saxena
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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तुम
जाओ
पर
यादों
को
तो
रहने
दो
यादों
का
भी
एक
सहारा
होता
है
Sachin Shalini
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उस
की
यादों
की
काई
पर
अब
तो
ज़िंदगी-भर
मुझे
फिसलना
है
Siraj Faisal Khan
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इतना
तो
याद
है
इक
वा'दा
किया
था
लेकिन
हम
ने
क्या
वा'दा
किया
था
हमें
ये
याद
नहीं
Bismil Dehlavi
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ख़ुद
को
मसरूफ़
किए
रखने
की
कोशिश
करना
क्या
तेरी
याद
के
ज़ुमरे
में
नहीं
आता
है
Jawwad Sheikh
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जहाँ
पंखा
चल
रहा
है
वहीं
रस्सी
भी
पड़ी
है
मुझे
फिर
ख़याल
आया,
अभी
ज़िन्दगी
पड़ी
है
Zubair Ali Tabish
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हमको
किसी
से
अब
भी
मोहब्बत
तलब
नहीं
इज़्ज़त
तलब
तो
है
पर
अक़ीदत
तलब
नहीं
इतना
हसीन
हैं
वो
तख़य्युल
कि
क्या
कहें
बस
इतना
जान
लो
की
हक़ीक़त
तलब
नहीं
फ़र्त-ए-ख़ुशी
से
अपनी
जो
भी
रश्क
करते
हैं
उनको
तिरी
बनाई
वो
जन्नत
तलब
नहीं
बस
ख़ुद-कुशी
से
बचने
का
ज़रिया
है
शा'इरी
हमको
सुख़न-वरी
से
तो
शोहरत
तलब
नहीं
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Sabir Hussain
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साल
भर
करता
रहा
हूँ
मैं
रियाज़त
कह
ही
दूँगा
आज
होली
है
तो
कह
पाया
नहीं
होली
मुबारक
Sabir Hussain
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तेरी
दोस्ती
तो
महँगी
पड़ी
है
चारा-गर
ज़ख़्म
हर-सू
अब
मेरा
इंतिज़ार
करते
हैं
Sabir Hussain
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उम्मीद
ए
विसाल
ए
जांँ
मिसमार
हुई
नहीं
ये
दामन-ए-शब
अभी
दुश्वार
हुई
नहीं
उसने
भी
शब-ए-गुज़श्ता
क़ैद
रखी
हवस
हम
सेे
भी
बदन
की
सरहद
पार
हुई
नहीं
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Sabir Hussain
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करना
गर
पड़े
बे-पर्दा
हमें
उसे
साबिर
हम
तो
ऐसी
शोहरत
से
दरकिनार
करते
हैं
Sabir Hussain
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