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Kumar Prem Pinaki
man jab maun ho jaata hai
man jab maun ho jaata hai | मन जब मौन हो जाता है
- Kumar Prem Pinaki
मन
जब
मौन
हो
जाता
है
ख़ुद
में
कौन
हो
जाता
है
- Kumar Prem Pinaki
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तनक़ीद
न
तक़रार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
हैरत
है
मेरे
यार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
गूँगों
को
तकल्लुक़
के
मवाक़े
हैं
मुयस्सर
हम
माहिर-ए-गुफ़्तार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
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Ahmad Abdullah
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ये
पानी
ख़ामुशी
से
बह
रहा
है
इसे
देखें
कि
इस
में
डूब
जाएँ
Ahmad Mushtaq
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आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
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Ashu Mishra
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शब-ए-हिज्रां
बुझा
बैठी
हूँ
मैं
सारे
सितारे
पर
कोई
फ़ानूस
रौशन
है
ख़मोशी
से
मेरे
अंदर
Kiran K
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चुप
हुए
तो
घर
से
निकले
जा
के
दफ़्तर
रो
पड़े
इश्क़
ऐसी
जंग
है
जिस
में
सिकंदर
रो
पड़े
बस
दिलों
पर
कब
किसी
का
चल
सका
है
इश्क़
में
फिर
से
डायल
कर
के
हम
वो
एक
नंबर
रो
पड़े
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Prashant Sharma Daraz
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ग़लत
बातों
को
ख़ामोशी
से
सुनना
हामी
भर
लेना
बहुत
हैं
फ़ाएदे
इस
में
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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वो
शांत
बैठा
है
कब
से
मैं
शोर
क्यूँँॅं
न
करूँॅं
बस
एक
बार
वो
कह
दे
कि
चुप
तो
चूँ
न
करूँॅं
Charagh Sharma
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चुप
रहते
हैं
चुप
रहने
दो
राज़
बताओ
खोले
क्या
बात
वफ़ा
की
तुम
करती
हो
बोलो
हम
कुछ
बोले
क्या
उल्फ़त
तो
अफ़साना
है
तुम
करती
खूब
सियासत
हो
हम
भी
हैं
मक़बूल
बहुत
अब
बोल
किसी
के
होलें
क्या
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Anand Raj Singh
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क्या
ख़ूब
तुम
ने
ग़ैर
को
बोसा
नहीं
दिया
बस
चुप
रहो
हमारे
भी
मुँह
में
ज़बान
है
Mirza Ghalib
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हर
एक
बात
को
चुप-चाप
क्यूँँ
सुना
जाए
कभी
तो
हौसला
कर
के
'नहीं'
कहा
जाए
Nida Fazli
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ये
दुनिया
कितनी
प्यारी
है
इस
में
ही
दुनिया
सारी
है
जीता
है
उसने
कितना
कुछ
इक
शर्त
अभी
भी
हारी
है
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Kumar Prem Pinaki
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मन
में
पहले
सौ
युद्ध
हुए
जीते
उन
सेे
तब
बुद्ध
हुए
Kumar Prem Pinaki
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यादें
ही
देखो
पूरी
हैं
रूहों
के
जलने
के
लिए
धोखे
यहाँ
ज़रूरी
हैं
यारों
सॅंभलने
के
लिए
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Kumar Prem Pinaki
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पहले
हिम्मत
बाँधी
फिर
हिम्मत
से
दो
चार
किया
क़िस्मत
की
ऑंधी
आई
हार
नहीं
स्वीकार
किया
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Kumar Prem Pinaki
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इतने
चेहरे
हैं
दुनिया
में
कोई
हर
चेहरे
पर
मरता
क्या
तुम
सेे
बेहतर
यूँँ
न
सोचा
था
बस
तुम
पर
मरता
करता
क्या
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Kumar Prem Pinaki
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