main kya hooñ kisi gham se aziz hi nahin hota | मैं क्या हूँ किसी ग़म से आजिज़ ही नहीं होता

  - Zaan Farzaan
मैंक्याहूँकिसीग़मसेआजिज़हीनहींहोता
सोसाथमसर्रतकेहरगिज़हीनहींहोता
तुझकोहैरईसोंसेपरइतनीअदावतक्यूँँ
हरएकरईसआख़िरक़ाबिज़हीनहींहोता
मस्जिदजोदिखीख़ालीलोगोंसेसबबपूछा
कहतेकिमुहल्लेमेंहाफ़िज़हीनहींहोता
वोलोगभीमंज़िलकोछूपातेनहींअक्सर
रस्तेमेंकभीजिनकेहाजिज़हीनहींहोता
गोलाखदफ़ाख़ुदकोथाहुक्मदियामैंने
परहुक्मकभीमेरानाफ़िज़हीनहींहोता
  - Zaan Farzaan
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