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Yogamber Agri
ye dil phir kisi se bhi joda nahin
ye dil phir kisi se bhi joda nahin | ये दिल फिर किसी से भी जोड़ा नहीं
- Yogamber Agri
ये
दिल
फिर
किसी
से
भी
जोड़ा
नहीं
मैं
टूटा
हूँ
पर
ख़ुद
को
तोड़ा
नहीं
तेरे
कहने
पे
तुम
को
बस
छोड़ा
है
मगर
मैं
अभी
तुम
से
बिछड़ा
नहीं
हाँ
लिखकर
जो
पन्ना
दिया
था
तू
ने
उसे
आज़
तक
मैं
ने
मोड़ा
नहीं
अभी
राह
में
रात
काली
है
पर
चमकना
कभी
मैं
ने
छोड़ा
नहीं
कई
तारे
थे
छत
के
ऊपर
मेरे
उन्हें
देखा
पर
उन
को
तोड़ा
नहीं
- Yogamber Agri
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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उम्र
शायद
न
करे
आज
वफ़ा
काटना
है
शब-ए-तन्हाई
का
Altaf Hussain Hali
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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चराग़ों
को
आँखों
में
महफ़ूज़
रखना
बड़ी
दूर
तक
रात
ही
रात
होगी
Bashir Badr
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घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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वो
आफ़ताब
लाने
का
देकर
हमें
फ़रेब
हम
सेे
हमारी
रात
के
जुगनू
भी
ले
गया
Rajesh Reddy
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शब
जो
होली
की
है
मिलने
को
तिरे
मुखड़े
से
जान
चाँद
और
तारे
लिए
फिरते
हैं
अफ़्शाँ
हाथ
में
Mushafi Ghulam Hamdani
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लिखे
जो
शे'र
उस
पे
हम
वही
तुम
को
सुनाते
हैं
ये
सब
उसका
दिया
है
आज़
जो
हम
मुस्कुराते
हैं
यूँँ
तो
तहज़ीब
से
तुम
सब
ग़ज़ल
के
शे'र
सुनते
हो
तो
फिर
तुम
दाद
में
यूँँ
सीटियाँ
ही
क्यूँ
बजाते
हैं
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Yogamber Agri
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घड़ी
है
आज़
अंतिम
साल
की
इक
रात
जाने
की
क़मर
को
रात
बिलकुल
बे-वफ़ा
ही
लग
रही
होगी
Yogamber Agri
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बस
दो
क़दम
की
दूरी
पे
घर
उसका
ही
है
पर
उन
रास्तों
से
अन
बन
हैं
बहुत
सी
मेरी
Yogamber Agri
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शे'र
सी
ग़ज़ल
सी
मेरे
क़रीब
तुम
ही
थी
जुर्म
लगता
है
औरों
के
क़रीब
जाना
अब
Yogamber Agri
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बुरी
तुम
नहीं
मैं
बुरा
इतना
हूँ
की
भुला
भी
नहीं
पा
रहा
हूँ
मैं
तुम
को
Yogamber Agri
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