shaam hote hi palat kar use ghar jaana tha | शाम होते ही पलट कर उसे घर जाना था

  - ALI ZUHRI
शामहोतेहीपलटकरउसेघरजानाथा
मैंथाआवारामुझेजानेकिधरजानाथा
बड़ानुक़सानहुआइश्क़कीजुर्रतकरके
इससेेअच्छाथामुझेइश्क़सेडरजानाथा
मैंनेक्यूँँइश्क़कीगलियोंमेंकियाशोरबपा
मुझकोचुपचापदबेपाँवगुज़रजानाथा
मैंशजरथावोपरिंदासोउसेभीकिसीदिन
छोड़करमुझकोकिसीऔरशजरजानाथा
अपनारिश्ताभीकिसीरेतमहलजैसाथा
धीरेधीरेहीसहीउसकोबिखरजानाथा
आजवोख़ुशहैकिसीअजनबीकीबाँहोंमें
वोजिसेमुझसेेबिछड़करकभीमरजानाथा
जीबहुतथाकितेरेपासठहरजाऊँपर
मैंमुसाफ़िरथामुझेअपनेनगरजानाथा
जितनारोयाहूँमैंरातोंकोजुदाईमेंतेरी
ख़ालीदरियाभीअगरहोतातोभरजानाथा
  - ALI ZUHRI
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