hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Vishakt ki Kalam se
kisi ko khelni hai saath tere rang kii holi
kisi ko khelni hai saath tere rang kii holi | किसी को खेलनी है साथ तेरे रंग की होली
- Vishakt ki Kalam se
किसी
को
खेलनी
है
साथ
तेरे
रंग
की
होली
कहीं
पर
खेलते
हैं
साथ
तेरे
भंग
की
होली
नहीं
मैं
जानता
खेलूँ
कहाँ
किस
ढंग
की
होली
मुझे
है
चाह
खेलूँ
संग
तेरे
शंग
की
होली
- Vishakt ki Kalam se
Download Sher Image
किसी
को
ज़ार
बनना
है
किसी
को
हार
बनना
है
किसी
को
आग
खानी
है
किसे
अंगार
बनना
है
किसी
का
सुर
नहीं
लगता
उसे
झंकार
बनना
है
हमारा
दिल
नहीं
लगता
हमें
टंकार
बनना
है
समूचे
विश्व
के
आगे
मुझे
ललकार
बनना
है
मुझे
ही
आग
खानी
है
मुझे
अंगार
बनना
है
लहू
से
खेलने
वाली
मुझे
तलवार
बनना
है
मुझे
भी
जीत
चखनी
है
किसी
की
हार
बनना
है
मुझे
आकाश
छूना
है
नहीं
बस
भार
बनना
है
मुझे
सब
वेद
पढ़ने
हैं
नहीं
बेकार
बनना
है
जगत
की
इस
कथा
का
अब
मुझे
ही
सार
बनना
है
मुझे
दुनिया
बदलनी
है
मुझे
औजार
बनना
है
नहीं
मानव
मुझे
रहना
मुझे
अवतार
बनना
है
Read Full
Vishakt ki Kalam se
Download Image
1 Like
मुझे
आता
नहीं
कुछ
भी
यही
सब
मानते
हैं
मुझे
लगता
नहीं
ये
लोग
मुझको
जानते
हैं
Vishakt ki Kalam se
Send
Download Image
1 Like
किताबों
की
कहानी
में
तुझे
ही
खोजते
हैं
निकल
जाता
हैं
दिन
पर
रात
भर
हम
सोचते
हैं
Vishakt ki Kalam se
Send
Download Image
1 Like
मुझे
कुछ
भी
नहीं
समझा
उन्होंने
जिन्हें
मैं
ख़ास
अपना
मानता
था
मुझे
धोखा
दिया
आँखों
ने
मेरी
नहीं
ये
लोग
जिसको
जानता
था
Read Full
Vishakt ki Kalam se
Send
Download Image
1 Like
भरोसा
ही
नहीं
है
जब
किसी
की
बात
में
अब
दग़ा
देते
वही
जो
रह
रहे
हैं
साथ
में
सब
उसूलों
पर
चलेंगे
जब
कभी
ऐसा
लगेगा
तभी
बस
छूट
जाएगा
तुम्हारे
हाथ
से
सब
नहीं
कोई
किसी
के
साथ
में
बस
पास
हैं
सब
नहीं
देंगे
कभी
वो
साथ
लेकिन
ख़ास
हैं
सब
Read Full
Vishakt ki Kalam se
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Falak Shayari
Aam Shayari
Khushi Shayari
Bahana Shayari
Kitaaben Shayari