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Vishakt ki Kalam se
bharosa hi nahin hai jab kisi kii baat men ab
bharosa hi nahin hai jab kisi kii baat men ab | भरोसा ही नहीं है जब किसी की बात में अब
- Vishakt ki Kalam se
भरोसा
ही
नहीं
है
जब
किसी
की
बात
में
अब
दग़ा
देते
वही
जो
रह
रहे
हैं
साथ
में
सब
उसूलों
पर
चलेंगे
जब
कभी
ऐसा
लगेगा
तभी
बस
छूट
जाएगा
तुम्हारे
हाथ
से
सब
नहीं
कोई
किसी
के
साथ
में
बस
पास
हैं
सब
नहीं
देंगे
कभी
वो
साथ
लेकिन
ख़ास
हैं
सब
- Vishakt ki Kalam se
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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मेरे
साथ
हँसने
वालों
शरीक
हों
दुख
में
गर
गुलाब
की
ख़्वाहिश
है
तो
चूम
काँटों
को
Neeraj Neer
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अब
साथ
नहीं
है
भी
तो
शिकवा
नहीं
'अख़्तर'
एहसान
भी
मुझ
पर
मिरे
भाई
के
बहुत
थे
Majeed Akhtar
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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आप
के
बाद
हर
घड़ी
हम
ने
आप
के
साथ
ही
गुज़ारी
है
Gulzar
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Read More
आज
कोई
और
मुझ
से
क्या
कहेगा
मर
गया
जो
दौर
मुझ
से
क्या
कहेगा
कह
न
पाया
बात
अपने
आप
से
जो
वो
बेचारा
और
मुझ
से
क्या
कहेगा
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Vishakt ki Kalam se
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क्या
पुराने
साल
में
तूने
बड़ा
कुछ
कर
दिया
है
या
नए
इस
साल
में
तू
कुछ
बड़ा
ही
कर
रहा
है
ढूँढता
है
रोज़
मौक़े
बस
मिले
दारू
कहीं
से
और
पीकर
फिर
वही
जो
कर
रहा
था
कर
रहा
है
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Vishakt ki Kalam se
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मुझे
आज़ाद
कर
दो
रोज़
के
इस
मामले
से
अब
मुझे
अब
मौत
बख़्शो
जी
चुका
मैं
ज़िंदगी
अपनी
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जिसे
दौलत
कमानी
थी
नहीं
वो
नाम-जू
साक़ी
मुझे
शिव
में
समाना
है
यही
है
आरज़ू
बाक़ी
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हवा
को
रोकने
की
बात
जैसे
कर
रहे
हो
तुम
मुझे
ये
नौकरी
कम
जेल
ज़्यादा
लग
रही
है
जी
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