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Uday sharma
kisne kitnii jagah diye hai tarah tarah ke ghaav
kisne kitnii jagah diye hai tarah tarah ke ghaav | किसने कितनी जगह दिए है तरह तरह के घाव
- Uday sharma
किसने
कितनी
जगह
दिए
है
तरह
तरह
के
घाव
फिर
भी
दरिया
पानी
देता,
पेड़
हमेशा
छांव
- Uday sharma
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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मिल
जाऊँगा
दरिया
में
तो
हो
जाऊँगा
दरिया
सिर्फ़
इसलिए
क़तरा
हूँ
कि
मैं
दरिया
से
जुदा
हूँ
Nazeer Banarasi
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
Subhan Asad
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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कोई
समुन्दर,
कोई
नदी
होती,
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता?
Tehzeeb Hafi
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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वो
इतना
शांत
दरिया
था
मगर
जब
गया
तो
ले
गया
सब
कुछ
बहा
के
Siddharth Saaz
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दिल
अपना
ही
दे
बैठोगी
खुदको
तुम
जो
इन
आँखों
से
देखोगी
खुदको
तुम
तेरी
ख़ातिर
मैं
दुनिया
को
भुला
दूँगा
मेरी
ख़ातिर
जो
भूलोगी
खुदको
तुम
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Uday sharma
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इस
दुनिया
में
हम
इंसान
महीन
ग़ज़ल
है
ये
दुनिया
ऊपरवाले
की
ज़हीन
ग़ज़ल
है
हर
कोई
होता
है
ख़ास
तरह
की
ग़ज़ल
जाँ
हम
खारिज़
है
और
तू
बेहतरीन
ग़ज़ल
है
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Uday sharma
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नवाबों
की
नवाबी
से
नहीं
आती
ये
मुतमइनी
अमीरी
से
नहीं
आती
Uday sharma
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तुझको
जो
दिखता
है,
तू
वो
देख
रहा
है
पर
ऊपरवाला
तो,
सबको
देख
रहा
है
कुछ
नाजायज़
करने
पर
लगता
है
मुझको
मालिक
सबकुछ
छोड़
के
मुझको
देख
रहा
है
इस
सेे
बढ़कर
तेरी
लाचारी
क्या
होगी
एक
का
होकर
भी,
दूजे
को
देख
रहा
है
रब
भी
तुझको
उस
ही
नाज़
से
तकता
होगा
तू
जिस
नाज़
से
अपने
रब
को
देख
रहा
है
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Uday sharma
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ना
मंज़ूर
ज़मीर
के
आगे
चाहे
जाँ
हो
तीर
के
आगे
पँखो
ने
दम
तोड़
दिया
है
पैरो
की
जंज़ीर
के
आगे
आख़िर
किसकी
चलती
है
फिर
मालिक
की
शमशीर
के
आगे
जिस
दुनिया
में
इतना
कुछ
है
पर
क्या
है
इक
पीर
के
आगे
?
जो
भी
तेरे
नाम
चलेगा
आएँगे
उस
तीर
के
आगे
लाख
बला
के
फिल्टर
सिल्टर
कम,
तेरी
तस्वीर
के
आगे
हर
ग़म
का
अब
सब्र
यही
है
क्या
मिलता
तक़दीर
के
आगे
?
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Uday sharma
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