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Tiwari Jitendra
mujhe dar ishq se lagne laga hai
mujhe dar ishq se lagne laga hai | मुझे डर इश्क़ से लगने लगा है
- Tiwari Jitendra
मुझे
डर
इश्क़
से
लगने
लगा
है
क़फ़स
दिल
में
बड़ी
दिक्कत
हुई
है
- Tiwari Jitendra
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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हम
वो
हैं
जो
नइँ
डरते
वक़्त
के
इम्तिहान
से
वो
परिंदे
और
थे
जो
डर
गए
आसमान
से
Madhav
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तुम
पर
इक
दिन
मरते
मरते
मर
जाना
है,
दीवाने
को
कहाँ
ख़बर
है
घर
जाना
है
एक
शब्द
तुमको
अंधेरे
का
ख़ौफ़
दिलाकर,
बाद
में
ख़ुद
भी
जान
बूझकर
डर
जाना
है
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Vishal Singh Tabish
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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मुझे
अब
तुम
से
डर
लगने
लगा
है
तुम्हें
मुझ
से
मोहब्बत
हो
गई
क्या
Jaun Elia
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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डर
मुझे
मेरी
मुहब्बत
एक
दिन
खो
जाएगी
यार
मुझको
लग
रहा
वो
ग़ैर
की
हो
जाएगी
मैं
सभी
वादे
पुराने
ही
निभाते
जाऊँगा
और
वो
जाकर
किसी
की
बाँह
में
सो
जाएगी
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Ravi 'VEER'
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दर्द
देकर
दूर
जाना
ठीक
है
झूठ
के
आँसू
बहाना
ठीक
है
गाँव
आना
जब
कभी
दहलीज़
पर
देख
मुझको
लौट
जाना
ठीक
है
वो
कभी
दिल
जान
से
प्यारा
रहा
अब
उसी
का
दिल
दुखाना
ठीक
है
प्यार
मेरा
जिस्म
पे
क्यूँ
जा
टिके
चूम
कर
तस्वीर
आना
ठीक
है
ख़ुद-कुशी
से
लोग
मरते
है
यहाँ
लोग
कहते
है
ज़माना
ठीक
है
तुम
तिवारी
लौट
जाओ
नींद
में
ख़्वाब
में
उसका
सताना
ठीक
है
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Tiwari Jitendra
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मैं
तुझे
बात
में
नहीं
रखता
चाँद
मैं
रात
में
नहीं
रखता
इश्क़
करता
हूँ
एक
ख़ुदास
मैं
बात
अब
जात
में
नहीं
रखता
दुश्मनी
मैं
सभी
से
कर
लेता
प्यार
खैरात
में
नहीं
रखता
ये
तिवारी
बदल
चुका
है
अब
जीत
को
मात
में
नहीं
रखता
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Tiwari Jitendra
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क़तारो
में
खड़ा
होना
नहीं
आता
अना
के
साथ
समझौता
नहीं
आता
तुझे
शौहर
मुबारक
हो
मेरी
जाँना
मुहब्बत
बाद
फिर
रिश्ता
नहीं
आता
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Tiwari Jitendra
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चला
अब
लौट
मैं
भी
गांव
अपने
शहरस
इश्क़
का
बोझा
उठा
कर
Tiwari Jitendra
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अगर
जो
लाश
को
दरिया
में
भी
फेंका
कहीं
दरिया
न
जाए
डूब
ख़ुद
मुझ
में
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Tiwari Jitendra
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