vo badhte faasle paiham hamaari jaan le baithe | वो बढ़ते फ़ासले पैहम हमारी जान ले बैठे

  - Saurabh Mehta 'Alfaaz'
वोबढ़तेफ़ासलेपैहमहमारीजानलेबैठे
मुसलसलइश्क़केमातमहमारीजानलेबैठे
उधरथींबारिशेंशायदइनायतऔरउल्फ़तकी
यहाँतोहिज्रकेमौसमहमारीजानलेबैठे
किसीटूटेहुएदिलकोकहोकैसेकरारआए
कहींऐसाहोमरहमहमारीजानलेबैठे
बसउनकीउँगलियोंपरहमनेअपनीज़िन्दगीरखदी
हुआबसइकइशाराहमहमारीजानलेबैठे
शजरसारेख़फ़ाथेजबचितामेंख़ाकहोतेथे
किअपनेसंगयेआदमहमारीजानलेबैठे
हमींउल्फ़तकेइसदंगलमेंजोकूदेबिनासोचे
करेंगेक्याअगररुस्तमहमारीजानलेबैठे
बदलदेतेहैंसब'अल्फ़ाज़'सारेसुरग़ज़लकेहम
किइससेेपहलेयेसरगमहमारीजानलेबैठे
  - Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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