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Tanya gupta
juda hai vo KHuda se par KHuda usse juda hai kab
juda hai vo KHuda se par KHuda usse juda hai kab | जुदा है वो ख़ुदास पर ख़ुदा उस सेे जुदा है कब
- Tanya gupta
जुदा
है
वो
ख़ुदास
पर
ख़ुदा
उस
सेे
जुदा
है
कब
नहीं
पाया
ख़ुदा
जिसने
उसे
आख़िर
मिला
क्या
है
- Tanya gupta
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चाँद
सा
मिस्रा
अकेला
है
मिरे
काग़ज़
पर
छत
पे
आ
जाओ
मिरा
शे'र
मुकम्मल
कर
दो
Bashir Badr
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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तमाम
होश
ज़ब्त
इल्म
मस्लहत
के
बाद
भी
फिर
इक
ख़ता
मैं
कर
गया
था
माज़रत
के
बाद
भी
Pallav Mishra
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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तमाम
नाख़ुदा
साहिल
से
दूर
हो
जाएँ
समुंदरों
से
अकेले
में
बात
करनी
है
Tehzeeb Hafi
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यही
अंजाम
अक्सर
हम
ने
देखा
है
मोहब्बत
का
कहीं
राधा
तरसती
है
कहीं
कान्हा
तरसता
है
Virendra Khare Akela
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कुछ
इस
तरह
से
गुज़ारी
है
ज़िन्दगी
जैसे
तमाम
उम्र
किसी
दूसरे
के
घर
में
रहा
Ahmad Faraz
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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भले
ही
लाख
क़दमों
में
पड़ी
हो
दौलतें
मुर्शद
सुकून-ए-दिल
तेरे
दीदार
के
बिन
आ
नहीं
सकता
Tanya gupta
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अश्क़
जब
भी
देता
है
तो
रुमाल
रखता
है
इस
क़दर
भी
मेरा
इक
शख़्स
ख़याल
रखता
है
Tanya gupta
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समुंदर
को
यक़ीं
है
वो
उसी
की
थी
शरारत
देखो
कैसी
उस
नदी
की
थी
ज़रा
सुन
लो
मिरे
भी
शे'र
और
नग़्
में
ये
लड़की
भी
कभी
'आशिक़
किसी
की
थी
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Tanya gupta
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जिसे
इश्क़
था
ज़िंदगी
से
वही
मर
गया
ख़ुद-कुशी
से
मुझे
इश्क़
है
बस
तुझी
से
वो
ये
कह
रहा
है
सभी
से
कई
मुद्दतों
बाद
उसके
हुई
दोस्ती
बे-कसी
से
फ़क़त
माँगा
है
वक़्त
उसका
बता
वो
रहा
है
घड़ी
से
मिटा
जुगनुओं
का
गुमाँ
तब
मिले
जब
वो
इक
रौशनी
से
बता
राज़
सब
सेे
रहा
है
छुपा
कुछ
तो
पर्दा-दरी
से
छुए
चाँद
हैं
पर
ज़मीं
पर
ख़फा
आदमी
आदमी
से
मिला
है
ग़म-ए-दिल
मुझे
भी
लगा
है
गले
वो
किसी
से
वफ़ा
की
लड़ाई
में
हम-दम
डरे
तान्या
दिल-लगी
से
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Tanya gupta
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इक
सितमगर
के
सितम
इतने
रहे
तीरगी
को
रोशनी
कहते
रहे
वो
कभी
भी
तल्ख़
बातों
से
नहीं
कुछ
न
कहकर
इक
चुभन
देते
रहे
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Tanya gupta
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