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Tarun Bharadwaj
tumhein bhool jaaun sahi meinna aañsu bahaau'n sahi men
tumhein bhool jaaun sahi meinna aañsu bahaau'n sahi men | तुम्हें भूल जाऊँ सही में
- Tarun Bharadwaj
तुम्हें
भूल
जाऊँ
सही
में
न
आँसू
बहाऊँ
सही
में
- Tarun Bharadwaj
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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उसी
मक़ाम
पे
कल
मुझ
को
देख
कर
तन्हा
बहुत
उदास
हुए
फूल
बेचने
वाले
Jamal Ehsani
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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जिसे
जो
जी
में
आता
है
सो
लिखता
है
बड़ा
मुश्किल
है
कह
पाना
क़लम
का
दुख
Harsh saxena
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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रास
आ
जाएगा
इक
रोज़
तेरा
जाना
भी
हम
किसी
दुख
में
लगातार
नहीं
रोते
हैं
Inaam Azmi
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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कोई
हादसा
लेकर
आदमी
किधर
जाए
आदमी
अगर
कह
दे
हादसा
उदासी
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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कूज़ागर
को
प्यारा
था
चाक
पे
नाम
हमारा
था
लब
पे
तबस्सुम
बिखरा
था
आँख
में
पानी
खारा
था
उतर
गया
है
वो
दिल
से
आँखों
का
जो
तारा
था
प्यास
से
अपनी
जीत
गया
दरिया
से
जो
हारा
था
दैर-ओ-हरम
से
हार
गया
लोगों
को
जो
प्यारा
था
मेरी
पैदाइश
से
क़ब्ल
टूटा
कोई
तारा
था
ख़ाक-मिले
जो
नक़्श-ए-पा
राज़
उन्हीं
में
सारा
था
वो
मुरझाने
से
पहले
फूल
बहुत
ही
प्यारा
था
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Tarun Bharadwaj
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वा’दा-ए-वस्ले-यार
ले
डूबा
फिर
मुझे
ऐ’तिबार
ले
डूबा
वस्ल
का
वक़्त
गुज़रा
लम्हों
में
हिज्र
का
इंतिज़ार
ले
डूबा
इस
क़दर
मय
पी
क़र्ज़
की
मैंने
आख़िरश
ये
उधार
ले
डूबा
आँखों
को
इंतिज़ार
है
उसका
बस
यही
रोज़गार
ले
डूबा
इक
अजब
इश्क़
की
ख़ुमारी
थी
मुझको
तेरा
ख़ुमार
ले
डूबा
आँखों
से
अश्क
तक
छलकते
नहीं
दर्द
पर
इख़्तियार
ले
डूबा
यार
पर
क्यूँ
यक़ीं
करे
‘ताहिर‘
यार
दरिया
के
पार
ले
डूबा
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Tarun Bharadwaj
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तुम
तो
थक
कर
बैठ
गए
हो
मंज़िल
कैसे
पाओगे
तन्हा
अँधेरी
रात
बहुत
है
कैसे
दीप
जलाओगे
Tarun Bharadwaj
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पढ़े-लिखे
बालक
तेरी
क्या
ज़िम्मेदारी
है
सामने
भूखा
बच्चा
है
और
माँ
दुखियारी
है
Tarun Bharadwaj
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पहले
सी
शान
ढूॅंढ
कर
ले
आ
मेरी
पहचान
ढूॅंढ
कर
ले
आ
बादशाहत
की
जिसको
फ़िक्र
न
हो
ऐसा
सुलतान
ढूॅंढ
कर
ले
आ
जीव
निर्जीव
में
न
समझे
भेद
नेक
इंसान
ढूॅंढ
कर
ले
आ
इश्क़
की
ख़ुश्बू
जिस
सेे
आती
न
हो
ऐसा
दीवान
ढूॅंढ
कर
ले
आ
तेरा
मेरा
हो
सबका
एक
ख़ुदा
सबका
भगवान
ढूॅंढ
कर
ले
आ
क़ैद
'ताहिर'
को
गरचे
करना
है
दिल
का
ज़िंदान
ढूॅंढ
कर
ले
आ
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Tarun Bharadwaj
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