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Tarun Bharadwaj
va'da-e-wasle-yaar le dooba
va'da-e-wasle-yaar le dooba | वा’दा-ए-वस्ले-यार ले डूबा
- Tarun Bharadwaj
वा’दा-ए-वस्ले-यार
ले
डूबा
फिर
मुझे
ऐ’तिबार
ले
डूबा
वस्ल
का
वक़्त
गुज़रा
लम्हों
में
हिज्र
का
इंतिज़ार
ले
डूबा
इस
क़दर
मय
पी
क़र्ज़
की
मैंने
आख़िरश
ये
उधार
ले
डूबा
आँखों
को
इंतिज़ार
है
उसका
बस
यही
रोज़गार
ले
डूबा
इक
अजब
इश्क़
की
ख़ुमारी
थी
मुझको
तेरा
ख़ुमार
ले
डूबा
आँखों
से
अश्क
तक
छलकते
नहीं
दर्द
पर
इख़्तियार
ले
डूबा
यार
पर
क्यूँ
यक़ीं
करे
‘ताहिर‘
यार
दरिया
के
पार
ले
डूबा
- Tarun Bharadwaj
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यानी
अब
उसकी
मुहब्बत
का
हलफ़
माँगूँ
मैं
यानी
अब
सुर्ख़
लबों
पे
मैं
सियाही
फेंकूँ
anupam shah
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छोड़ो
दुनिया
की
परवाहें,
करो
मोहब्बत
मुश्किल
हों
कितनी
भी
राहें,
करो
मोहब्बत
सुनकर
देखो
सारे
मंदिर
यही
कहेंगे
यही
कहेंगी
सब
दरगाहें,
करो
मोहब्बत
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Bhaskar Shukla
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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माना
के
मोहब्बत
का
छुपाना
है
मोहब्बत
चुपके
से
किसी
रोज़
जताने
के
लिए
आ
Ahmad Faraz
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परिंदे
उड़
गए
अब
सिर्फ़
शाख़
बाक़ी
है
शरीर
जल
गए
अब
सिर्फ़
राख़
बाक़ी
है
Tarun Bharadwaj
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दिल
का
मैं
समझा
था
क़रार
जिसे
वो
दिल-ए-बेक़रार
ले
डूबा
Tarun Bharadwaj
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अपना
भी
आराम
खोया
मुझको
भी
बिस्मिल
किया
तोड़कर
मुझ
सेे
त'अल्लुक़
तूने
क्या
हासिल
किया
Tarun Bharadwaj
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ख़ुदा
के
गीत
गाने
लग
गए
हैं
ये
मौसम
गुनगुनाने
लग
गए
हैं
सवेरा
हो
गया
है
वादियों
में
परिंदे
चहचहाने
लग
गए
हैं
अँधेरे
हो
गए
बेदार
जब
से
उजाले
थरथराने
लग
गए
हैं
मुहब्बत
एक
लम्हें
में
हुई
थी
जताने
में
ज़माने
लग
गए
हैं
दरो
दीवार
पर
हम
उँगलियों
से
तेरी
सूरत
बनाने
लग
गए
हैं
मेरा
रब
मुझ
सेे
राज़ी
हो
रहा
है
परिंदे
छत
पे
आने
लग
गए
हैं
चलो
अब
मय-कदे
की
राह
पकड़ें
क़दम
फिर
लड़खड़ाने
लग
गए
हैं
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Tarun Bharadwaj
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रातों
को
जागने
लगा
हूँ
अब
मेरे
घर
माहताब
आने
लगे
Tarun Bharadwaj
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