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Tarun Bharadwaj
dil men lagega she'r meraa teer ki tarah
dil men lagega she'r meraa teer ki tarah | दिल में लगेगा शे'र मेरा तीर की तरह
- Tarun Bharadwaj
दिल
में
लगेगा
शे'र
मेरा
तीर
की
तरह
मैं
भी
ग़ज़ल
कहूॅंगा
कभी
मीर
की
तरह
- Tarun Bharadwaj
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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आँखें
थकी
थकी
है
ये
दिल
भी
रोया
है
तेरी
ख़ातिर
हमने
क्या
क्या
खोया
है
Tarun Bharadwaj
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दिल
का
मैं
समझा
था
क़रार
जिसे
वो
दिल-ए-बेक़रार
ले
डूबा
Tarun Bharadwaj
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वा’दा-ए-वस्ले-यार
ले
डूबा
फिर
मुझे
ऐ’तिबार
ले
डूबा
वस्ल
का
वक़्त
गुज़रा
लम्हों
में
हिज्र
का
इंतिज़ार
ले
डूबा
इस
क़दर
मय
पी
क़र्ज़
की
मैंने
आख़िरश
ये
उधार
ले
डूबा
आँखों
को
इंतिज़ार
है
उसका
बस
यही
रोज़गार
ले
डूबा
इक
अजब
इश्क़
की
ख़ुमारी
थी
मुझको
तेरा
ख़ुमार
ले
डूबा
आँखों
से
अश्क
तक
छलकते
नहीं
दर्द
पर
इख़्तियार
ले
डूबा
यार
पर
क्यूँ
यक़ीं
करे
‘ताहिर‘
यार
दरिया
के
पार
ले
डूबा
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Tarun Bharadwaj
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रातों
को
जागने
लगा
हूँ
अब
मेरे
घर
माहताब
आने
लगे
Tarun Bharadwaj
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ख़ुदा
का
ज़िक्र
है
वाइज़
की
पारसाई
है
अगरचे
धूम
वहाँ
रिंदों
ने
मचाई
है
चला
है
जोश
में
मक़तल
की
ओर
जोशीला
उसी
को
देख
के
कितनों
को
अक़्ल
आई
है
हवा
से
लौटेंगे
उतरेगा
जब
नशा
सबका
ये
कह
के
रिंद
ने
मय
की
हँसी
उड़ाई
है
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Tarun Bharadwaj
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