यहाँहमसेेनहींउठतीज़रासीशामकीपीड़ा
उन्हेंपूछोउठातेहैंजोआठोयामकीपीड़ा
सनातनधर्मकीपीड़ायाहोघनश्यामकीपीड़ा
नहींसमझीकिसीनेभीहमारेरामकीपीड़ा
प्रतीक्षामेंहुआपत्थरजहाँकीआँखोंकापानी
नहींसमझाकोईलेकिनअयोध्याधामकीपीड़ा
जिसेरोटीमिलेहरदिनकोईभीकामकरनेसे
उसेरुकनेनहींदेतीकहींभीकामकीपीड़ा
जिसेखानामधुरलगताउसेखानेसेमतलबहै
कहाँसमझाकोईइंसाँकिसीभीआमकीपीड़ा
सदाआरामकरकेभीयेजीवनकटनहींसकता
कहाँझेलीहैहमसबनेकभीआरामकीपीड़ा