yahaañ hamse nahin uthatii zara sii shaam kii peeda | यहाँ हम सेे नहीं उठती ज़रा सी शाम की पीड़ा

  - Suryapratap swtantra
यहाँहमसेेनहींउठतीज़रासीशामकीपीड़ा
उन्हेंपूछोउठातेहैंजोआठोयामकीपीड़ा
सनातनधर्मकीपीड़ायाहोघनश्यामकीपीड़ा
नहींसमझीकिसीनेभीहमारेरामकीपीड़ा
प्रतीक्षामेंहुआपत्थरजहाँकीआँखोंकापानी
नहींसमझाकोईलेकिनअयोध्याधामकीपीड़ा
जिसेरोटीमिलेहरदिनकोईभीकामकरनेसे
उसेरुकनेनहींदेतीकहींभीकामकीपीड़ा
जिसेखानामधुरलगताउसेखानेसेमतलबहै
कहाँसमझाकोईइंसाँकिसीभीआमकीपीड़ा
सदाआरामकरकेभीयेजीवनकटनहींसकता
कहाँझेलीहैहमसबनेकभीआरामकीपीड़ा
  - Suryapratap swtantra
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