sozish-e-dil ke sabab se sardiyaan kam pad gaiin | सोज़िश-ए-दिल के सबब से सर्दियाँ कम पड़ गईं

  - komal selacoti
सोज़िश-ए-दिलकेसबबसेसर्दियाँकमपड़गईं
इतनेख़्वाबोंकोजलायातीलियाँकमपड़गईं
हमखुलेतोसबकीफिरमहरूमियाँकमपड़गईं
बंददरवाजेखुलेतोखिड़कियाँकमपड़गईं
जबगिनीकिरदार-ए-दीवानेमेंउट्ठीउँगलियाँ
मेरेसरसेपातलकसबउँगलियाँकमपड़गईं
कुछकुछज़ौक़-ए-नज़ाराकमहुआहैतेरेबाद
घरमेंदरवाज़ालगाकरखिड़कियाँकमपड़गईं
कमहुएहैकुछकलाईपरमिरेभीरंग-ए-ज़ख़्म
क्याकलाईपरतिरीभीचूड़ियाँकमपड़गईं
मरगईउम्मीदराह-ए-ख़्वाबपरइतनीदफ़ा
सम्त-ए-मंज़िलपरचढ़ातोसीढ़ियाँकमपड़गईं
ज़िंदगीकानापलेनेकुछदिवानेक्यागए
फिरहमारेशहरभरमेंरस्सियाँकमपड़गईं
क्यूँँख़ुदाकेवास्तेआपसमेंहमदोनोंलड़ें
क्यातिरेमेरेख़ुदाकीशक्तियाँकमपड़गईं
आजबच्चोंसेख़रीदाहैक़लमऔरफूलतो
नक़्श-ए-ग़ुर्बतपरमिरीकुछझुर्रियाँकमपड़गईं
  - komal selacoti
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