ki khud se khud ko ham itnaa chhupaate hain | कि ख़ुदस ख़ुद को हम इतना छुपाते हैं

  - komal selacoti
किख़ुदसख़ुदकोहमइतनाछुपातेहैं
किपर्देमेंभीबसशीशाछुपातेहैं
सफ़रसेहारकेआएहुएहमलोग
सफ़रभरमेंहुआख़र्चाछुपातेहैं
येइतनेख़ूब-सूरतलोगोंकेआगे
येबदसेूरतकिधरचेहराछुपातेहैं
जमीहैऐसीकाईप्यासकीहमपे
ज़बाँकीलारपरसहराछुपातेहैं
ज़रामा'सूमियततोज़ालिमोंकीदेख
अँधेरेमेंफ़क़तअंधाछुपातेहैं
उठातेहैंयेजोआँखोंतलकमुस्कान
लबोंकीजेबमेंक्याक्याछुपातेहैं
येइकमुद्दतसेइकहीशहरमेंहैंहम
सोअबहमशहरमेंकमराछुपातेहैं
  - komal selacoti
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