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Sumit Panchal
jal uthe hain charaaghh ki maanind
jal uthe hain charaaghh ki maanind | जल उठे हैं चराग़ की मानिंद
- Sumit Panchal
जल
उठे
हैं
चराग़
की
मानिंद
अब
हमें
ये
हवा
मुबारक
हो
- Sumit Panchal
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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सभी
रिश्तें
मैं
यूँँ
बचाए
हूँ
जैसे
तड़पते
दियों
को
हवा
देते
रहना
Parul Singh "Noor"
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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सब
दुखों
का
ये
समुंदर
पार
होगा
जब,
सभी
आफ़तों
के
पत्थरों
पर
नाम
होगा
राम
का
Shoonya Shrey
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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"उसके
हाथ
में
फूल
है"
मत
कहिए,
कहिए
उसका
हाथ
है
फूल
को
फूल
बनाने
में
Charagh Sharma
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कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
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मुहब्बत
के
समुंदर
की
कलाकारी
ग़ज़ब
की
है
कि
सब
कुछ
डूब
जाता
है
मगर
तर
कुछ
नहीं
होता
Muntazir Firozabadi
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आज
वो
दिन
भी
आ
गया
जिस
का
मुझ
को
शिद्दत
से
इंतिज़ार
रहा
Sumit Panchal
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सच
कहूँ
तो
तेरी
ज़रूरत
थी
काम
लेकिन
चला
लिया
मैंने
Sumit Panchal
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रात
की
बात
तो
और
कुछ
थी
मगर
ये
सवेरे
सवेरे
अँधेरा
घना
Sumit Panchal
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मुख़्तसर
दास्ताँ
हमारी
है
ज़िंदगी
राएगाँ
हमारी
है
ये
हमें
क्यूँँ
क़रार
आता
नहीं
जान
अटकी
कहाँ
हमारी
है
ये
ग़ज़ल
इक
खुली
किताब
है
और
ये
ग़ज़ल
राज़दाँ
हमारी
है
अब
तो
जो
भी
है
कुछ
तुम्हारा
है
ज़ात
भी
अब
कहाँ
हमारी
है
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Sumit Panchal
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दाव
पर
है
सब
मगर
मैं
कुछ
न
कर
पाया
अगर
मैं
Sumit Panchal
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