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Sohit Singla
haan tabaah bhi aalam sab kiya nahin maana
haan tabaah bhi aalam sab kiya nahin maana | हाँ तबाह भी आलम सब किया नहीं माना
- Sohit Singla
हाँ
तबाह
भी
आलम
सब
किया
नहीं
माना
इक
दरूँ
मिरा
लड़ता
ही
रहा
नहीं
माना
- Sohit Singla
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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ये
कब
कहती
हूँ
तुम
मेरे
गले
का
हार
हो
जाओ
वहीं
से
लौट
जाना
तुम
जहाँ
बेज़ार
हो
जाओ
Parveen Shakir
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बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
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एक
तरफ़
है
पूरी
दुनिया
एक
तरफ़
है
मेरा
घर
लेकिन
तुमको
बतला
दूँ
मैं
दुनिया
से
है
अच्छा
घर
सब
कमरों
की
दीवारों
पर
तस्वीरें
हैं
बस
तेरी
मुझ
सेे
ज़ियादा
तो
लगता
है
जानेमन
ये
तेरा
घर
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Tanoj Dadhich
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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हार
ख़ुद
से
बड़ी
नहीं
कोई
जीतने
को
फ़क़त
नहीं
'आलम
Sohit Singla
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मैं
मैं
नहीं
रहा
हूँ
तुझ
सेे
लगा
के
दिल
को
जो
जो
भी
बन
गया
हूँ
हर
अक्स
वो
तिरा
है
Sohit Singla
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उसने
जो
कहा
मैं
सब
मानता
रहा
हर
दम
वो
जो
भी
कभी
कुछ
मैंने
कहा
नहीं
माना
Sohit Singla
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मुझको
बक़ा
करती
नहीं
ये
ज़ीस्त
यूँं
मरती
नहीं
वो
छोड़कर
मुझको
गया
चाहत
मगर
भरती
नहीं
वो
याद
है
करती
मुझे
कहती
मगर
डरती
नहीं
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Sohit Singla
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हसद
को
ज़िंदा
कर
के
देखते
हैं
गली
उसकी
गुज़र
के
देखते
हैं
नहीं
ये
रास
आई
ज़िंदगी
सो
चलो
इक
बार
मर
के
देखते
हैं
सभी
बस
देखते
मंज़िल
मगर
वो
नहीं
दुख
सुख
सफ़र
के
देखते
हैं
नहीं
मैं
देखती
तुमको
अदास
मुझे
ये
बात
कर
के
देखते
हैं
सभी
कहते
हैं
उनको
गुलबदन
सो
ख़ुदी
गुलज़ार
भर
के
देखते
हैं
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Sohit Singla
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