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Sohit Singla
ik nahin pal ishq men bezaar apna
ik nahin pal ishq men bezaar apna | इक नहीं पल इश्क़ में बेज़ार अपना
- Sohit Singla
इक
नहीं
पल
इश्क़
में
बेज़ार
अपना
जीना
क्यूँँ
जिस्मों
बिना
दुश्वार
अपना
है
फ़ज़ा'
ओ
ज़ब्त
बस
यूँँ
जिस्म
मेरा
प्यार
मुझको
रखना
है
बस
प्यार
अपना
आके
मिल
जा
यूँँ
के
रूहें
इक
हो
जाएँ
जिस्म
तो
मरने
को
है
तैयार
अपना
- Sohit Singla
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बदन
का
ज़िक्र
बातिल
है
तो
आओ
बिना
सर
पैर
की
बातें
करेंगे
Fahmi Badayuni
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मैं
आ
रहा
हूँ
अभी
चूम
कर
बदन
उस
का
सुना
था
आग
पे
बोसा
रक़म
नहीं
होता
Shanawar Ishaq
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उस
साँवले
से
जिस्म
को
देखा
ही
था
कि
बस
घुलने
लगे
ज़बाँ
पे
मज़े
चाकलेट
के
Shahid Kabir
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है
उस
बदन
की
लत
मुझे
सो
दूसरा
बदन
अच्छा
तो
लग
रहा
है
मेरे
काम
का
नहीं
Vishnu virat
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ये
जानते
हैं
ठीक
नहीं
माँग
रहे
हैं
हम
एक
खंडहर
को
मकीं
माँग
रहे
हैं
सब
माँग
रहे
हैं
ख़ुदास
तेरा
जिस्म
और
हम
हैं,
कि
फ़क़त
तेरी
जबीं
माँग
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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अब
सुलगती
है
हथेली
तो
ख़याल
आता
है
वो
बदन
सिर्फ़
निहारा
भी
तो
जा
सकता
था
Ameer Imam
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ये
इश्क़
आग
है
और
वो
बदन
शरारा
है
ये
सर्द
बर्फ़
सा
लड़का
पिघलने
वाला
है
Shadab Asghar
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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हमारे
बाद
तेरे
इश्क़
में
नए
लड़के
बदन
तो
चू
मेंगे
ज़ुल्फ़ें
नहीं
सँवारेंगे
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Vikram Gaur Vairagi
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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धीरे
धीरे
हो
रही
है
ख़त्म
मेरी
ज़िन्दगी
धीरे
धीरे
हो
रही
है
दूर
मुझ
सेे
मेरी
जान
Sohit Singla
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उधर
वो
पागलों
सा
इश्क़
करती
है
इधर
मैं
हूँ
उसे
ही
पगली
कहता
हूँ
Sohit Singla
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हसद
को
ज़िंदा
कर
के
देखते
हैं
गली
उसकी
गुज़र
के
देखते
हैं
नहीं
ये
रास
आई
ज़िंदगी
सो
चलो
इक
बार
मर
के
देखते
हैं
सभी
बस
देखते
मंज़िल
मगर
वो
नहीं
दुख
सुख
सफ़र
के
देखते
हैं
नहीं
मैं
देखती
तुमको
अदास
मुझे
ये
बात
कर
के
देखते
हैं
सभी
कहते
हैं
उनको
गुलबदन
सो
ख़ुदी
गुलज़ार
भर
के
देखते
हैं
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Sohit Singla
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मैं
मैं
नहीं
रहा
हूँ
तुझ
सेे
लगा
के
दिल
को
जो
जो
भी
बन
गया
हूँ
हर
अक्स
वो
तिरा
है
Sohit Singla
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मता'-ए-ज़ीस्त
मेरी
है
सनम
आलम
का
सरमाया
फ़क़त
तेरा
ही
होकर
रहने
में
सबका
ख़सारा
है
Sohit Singla
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