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SIDDHARTH SHARMA
tu mujhko dekh tere shahar men ghar hai mohabbat ka
tu mujhko dekh tere shahar men ghar hai mohabbat ka | तू मुझको देख तेरे शहर में घर है मोहब्बत का
- SIDDHARTH SHARMA
तू
मुझको
देख
तेरे
शहर
में
घर
है
मोहब्बत
का
जो
रोता
है
नहीं
उसको
मगर
तू
याद
आती
है
तू
मुझ
सेे
डर
हाँ
सच
में
डर
मैं
तेरा
नाम
ले
दूँगा
मोहब्बत
है
नहीं
तो
तू
ग़ज़ल
के
बाद
आती
है
- SIDDHARTH SHARMA
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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इस
ख़ौफ़
में
कि
ख़ुद
न
भटक
जाएँ
राह
में
भटके
हुओं
को
राह
दिखाता
नहीं
कोई
Anwar Taban
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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मेरे
कमरे
में
उदासी
है
क़यामत
की
मगर
एक
तस्वीर
पुरानी
सी
हँसा
करती
है
Abbas Qamar
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निकले
जो
ढूँढने
थे
उन्हें
कब
ख़ुदा
मिला
मैं
इसलिए
ही
कहता
हूँ
दिल
से
दु'आ
मिला
चुपचाप
चाहनें
से
नहीं
मिलता
इश्क़
यार
मुझ
सेे
है
इश्क़
गर
तो
हवा
में
सदा
मिला
तू
छोड़
के
गया
था
मुझें
अच्छे
के
लिए
दुख
है
कि
जो
मिला
तुझे
वो
भी
बुरा
मिला
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SIDDHARTH SHARMA
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जीता
बना
दे
या
हारा
बना
दे
ऐ
माँ
मुझे
भी
सितारा
बना
दे
दरहम
के
आलम
में
न
छोड़
मुझको
अपनी
नज़र
का
नज़ारा
बना
दे
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SIDDHARTH SHARMA
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ख़ुदा
ने
है
किया
इस
इश्क़
को
मुश्किल
वही
मुश्किल
को
फिर
आसाँ
बनाता
है
मुहब्बत
के
सभी
क़िस्से
बुने
उसने
वही
दो
जिस्म
को
इक
जाँ
बनाता
है
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SIDDHARTH SHARMA
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उसने
अब
तक
वो
चूड़ी
उतारी
नहीं
या'नी
खो
बैठी
है
मुझको
हारी
नहीं
इक
दो
दो
वज़्न
है
बस
मोहब्बत
का
यार
पूरी
दुनिया
मगर
इस
से
भारी
नहीं
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SIDDHARTH SHARMA
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तेरा
होना
नहीं
भरता
जरा
भी
रौनकें
मुझ
में
तेरा
जाना
भी
मुझको
यार
अब
तन्हा
नहीं
करता
ये
मेरी
है
मुहब्बत
मैं
अकेला
कर
भी
सकता
हूँ
तेरा
मौजूद
होना
इसको
अब
दूना
नहीं
करता
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SIDDHARTH SHARMA
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