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SIDDHARTH SHARMA
jeeta banaa de ya haara banaa de
jeeta banaa de ya haara banaa de | जीता बना दे या हारा बना दे
- SIDDHARTH SHARMA
जीता
बना
दे
या
हारा
बना
दे
ऐ
माँ
मुझे
भी
सितारा
बना
दे
दरहम
के
आलम
में
न
छोड़
मुझको
अपनी
नज़र
का
नज़ारा
बना
दे
- SIDDHARTH SHARMA
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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माँग
सिन्दूर
भरी
हाथ
हिनाई
करके
रूप
जोबन
का
ज़रा
और
निखर
आएगा
जिसके
होने
से
मेरी
रात
है
रौशन
रौशन
चाँद
में
आज
वही
अक्स
नज़र
आएगा
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Azhar Iqbal
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किस
से
जा
कर
माँगिये
दर्द-ए-मोहब्बत
की
दवा
चारा-गर
अब
ख़ुद
ही
बेचारे
नज़र
आने
लगे
Shakeel Badayuni
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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जब
मिली
आँख
होश
खो
बैठे
कितने
हाज़िर
जवाब
हैं
हम
लोग
Jigar Moradabadi
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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तेरा
होना
नहीं
भरता
जरा
भी
रौनकें
मुझ
में
तेरा
जाना
भी
मुझको
यार
अब
तन्हा
नहीं
करता
ये
मेरी
है
मुहब्बत
मैं
अकेला
कर
भी
सकता
हूँ
तेरा
मौजूद
होना
इसको
अब
दूना
नहीं
करता
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SIDDHARTH SHARMA
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निभाने
का
तेरा
इरादा
न
हो
तो
मुझ
सेे
कोई
झूठा
वा'दा
न
हो
मोहब्बत
रहे
गाँवों
सा
तंग
यार
ये
शहरों
के
जैसे
कुशादा
न
हो
असर
हो
मोहब्बत
के
नग्मों
का,
पर
माँ
की
लोरी
से
ये
ज़ियादा
न
हो
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SIDDHARTH SHARMA
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मोहब्बत
ने
सिखाया
है
मोहब्बत
वक़्त
ज़ाया'
है
मगर
ये
दिल
न
जाने
क्यूँ
गुलाबें
फिर
ले
आया
है
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SIDDHARTH SHARMA
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उसने
अब
तक
वो
चूड़ी
उतारी
नहीं
या'नी
खो
बैठी
है
मुझको
हारी
नहीं
इक
दो
दो
वज़्न
है
बस
मोहब्बत
का
यार
पूरी
दुनिया
मगर
इस
से
भारी
नहीं
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SIDDHARTH SHARMA
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कि
मुझ
सेे
जान
के
अनजान
बन
सकते
हो
बन
जाना
मेरी
तुम
दीद
के
मेहमान
बन
सकते
हो
बन
जाना
नहीं
है
फ़ायदे
का
सौदा
बे-बस
इश्क़
मेरी
जान
मगर
चाहो
तो
तुम
नुक़सान
बन
सकते
हो
बन
जाना
जिगर
ने
है
कहा
ये
इश्क़
दरिया
आग
का
'साहिर'
अगर
तुम
डूब
के
आसान
बन
सकते
हो
बन
जाना
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SIDDHARTH SHARMA
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