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Abhishek Shukla
na behen to kya karen phir aap hi kahiye zaraa
na behen to kya karen phir aap hi kahiye zaraa | न बहें तो क्या करें फिर आप ही कहिए ज़रा
- Abhishek Shukla
न
बहें
तो
क्या
करें
फिर
आप
ही
कहिए
ज़रा
आप
सागर
से
नदी
का
फासला
तो
देखिये
- Abhishek Shukla
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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किसी
कली
किसी
गुल
में
किसी
चमन
में
नहीं
वो
रंग
है
ही
नहीं
जो
तिरे
बदन
में
नहीं
Farhat Ehsaas
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तुमने
जो
फूल
लेते
में
छू
लीं
हैं
उंगलियाँ
मेरे
बदन
से
आएगी
ख़ुशबू
गुलाब
की
Siddharth Saaz
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उड़ाने
पर
जो
आ
जाऊँ
उड़ा
दूँ
होश
दुनिया
के
मगर
मैं
फूल
से
तितली
उड़ा
सकता
नहीं
यारों
Divy Kamaldhwaj
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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"उसके
हाथ
में
फूल
है"
मत
कहिए,
कहिए
उसका
हाथ
है
फूल
को
फूल
बनाने
में
Charagh Sharma
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नदी
आँखें
भँवर
ज़ुल्फ़ें
कहाँ
तैरूँ
कहाँ
डूबूँ
कि
तेरे
शहर
में
सब
की
अदाएँ
एक
जैसी
हैं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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किसी
के
होठ
समुंदर
में
भी
तरसते
रहे
किसी
की
प्यास
को
सहरा
में
मिल
गया
पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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इक
दरिया
है
बहता
बहता
और
समुंदर
गहरा
है
उसकी
आँखों
में
जितना
है
सारा
मंज़र
गहरा
है
इतनी
जल्दी
भर
जाएगा
ये
ऐसा
भी
ज़ख़्म
नहीं
बड़ी
तसल्ली
से
मारा
है
उसने
ख़ंजर
गहरा
है
यूँँ
हँसने
से
क्या
होता
है,
आँखों
को
देखा
कीजे
बाहर
जो
जितना
छिछला
है
उतना
अंदर
गहरा
है
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Abhishek Shukla
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नहीं
है
वो
मेरी
क़िस्मत
में
हाँ
ये
जानता
हूँ
मैं
नशे
में
भी
रहूँ
तब
भी
उसे
पहचानता
हूँ
मैं
नहीं
मैं
मानता
कि
इश्क़
में
शामिल
रहें
दो
जिस्म
किसी
का
रात
भर
रोना
मोहब्बत
मानता
हूँ
मैं
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Abhishek Shukla
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इतनी
नफ़रत
इक
दूजे
से
करते
हैं
हम
दोनों
में
यार
मोहब्बत
होनी
थी
Abhishek Shukla
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मैं
कहूँगा
तो
शहर
ये
तुम
सेे
पूछेगा
ज़रूर
मैं
तुम्हारे
हक़
में
ज़्यादा
बोल
भी
सकता
नहीं
Abhishek Shukla
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