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Shubham Tiwari
yaqeenan shayari karne lagega
yaqeenan shayari karne lagega | यक़ीनन शा'इरी करने लगेगा
- Shubham Tiwari
यक़ीनन
शा'इरी
करने
लगेगा
जिसे
भी
दिख
गया
चहरा
तुम्हारा
- Shubham Tiwari
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रोना
हो
आसान
हमारा
इतना
कर
नुक़्सान
हमारा
बात
नहीं
करनी
तो
मत
कर
चेहरा
तो
पहचान
हमारा
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Shariq Kaifi
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आइना
देख
कर
तसल्ली
हुई
हम
को
इस
घर
में
जानता
है
कोई
Gulzar
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इस
दौर
में
इंसान
का
चेहरा
नहीं
मिलता
कब
से
मैं
नक़ाबों
की
तहें
खोल
रहा
हूँ
Moghisuddin Fareedi
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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मैं
तो
'मुनीर'
आईने
में
ख़ुद
को
तक
कर
हैरान
हुआ
ये
चेहरा
कुछ
और
तरह
था
पहले
किसी
ज़माने
में
Muneer Niyazi
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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कुछ
ने
आँखें
कुछ
ने
चेहरा
देखा
है
सब
ने
तुझ
को
थोड़ा
थोड़ा
देखा
है
Tousief Tabish
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इतना
रक़्स
किया
है
मैंने
सीधा
चलना
भूल
गया
हूँ
Shubham Tiwari
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तुम्हारे
सर
की
है
आदत
अभी
तक
अभी
तक
है
झुका
कंधा
हमारा
Shubham Tiwari
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मुस्कुराने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
घर
सजाने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
ऐब
अपने
तो
सारे
मिटा
कर
के
मैं
गीत
गाने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
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Shubham Tiwari
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किसी
का
मुस्कुराना
हो
गया
है
ये
मौसम
फिर
सुहाना
हो
गया
है
दिनों
को
याद
करके
रो
रहा
हूँ
जिन्हें
गुज़रे
ज़माना
हो
गया
है
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Shubham Tiwari
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अजब
व्यापार
करने
लग
गया
हूँ
मैं
दो
का
चार
करने
लग
गया
हूँ
मैं
जिस
सेे
दोस्ती
करने
गया
था
उसी
से
प्यार
करने
लग
गया
हूँ
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Shubham Tiwari
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