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Shubham Tiwari
qaid men hooñ haal ye hai bolta tasveer se
qaid men hooñ haal ye hai bolta tasveer se | क़ैद में हूँ हाल ये है बोलता तस्वीर से
- Shubham Tiwari
क़ैद
में
हूँ
हाल
ये
है
बोलता
तस्वीर
से
अब
परिंदे
को
मुहब्बत
हो
गई
ज़ंजीर
से
डाल
कर
झूठी
हँसी
मैं
हँस
रहा
हूँ
बेवजह
और
ग़म
तारी
हुआ
है
अब
मेरी
तासीर
से
- Shubham Tiwari
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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शब
के
सन्नाटे
में
ये
किस
का
लहू
गाता
है
सरहद-ए-दर्द
से
ये
किस
की
सदा
आती
है
Ali Sardar Jafri
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फिर
नए
साल
की
सरहद
पे
खड़े
हैं
हम
लोग
राख
हो
जाएगा
ये
साल
भी
हैरत
कैसी
Aziz Nabeel
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ख़्वाबों
की
ता'बीर
बनी
है
इक
लड़की
मेरे
मन
की
हीर
बनी
है
इक
लड़की
दुनिया
तुझ
को
कब
का
छोड़
चुके
होते
पैरों
की
ज़ंजीर
बनी
है
इक
लड़की
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Vikas Sahaj
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
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Harsh saxena
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कोई
तो
सूद
चुकाए
कोई
तो
ज़िम्मा
ले
उस
इंक़लाब
का
जो
आज
तक
उधार
सा
है
Kaifi Azmi
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उसकी
तस्वीर
माँग
बैठा
हूँ
यानी
कश्मीर
माँग
बैठा
हूँ
Shubham Tiwari
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मुस्कुराने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
घर
सजाने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
ऐब
अपने
तो
सारे
मिटा
कर
के
मैं
गीत
गाने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
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Shubham Tiwari
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मुस्कुराने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
घर
सजाने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
ऐब
अपने
तो
सारे
मिटा
करके
मैं
गीत
गाने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
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Shubham Tiwari
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ज़ख़्म
पहले
से
हमने
हरा
कर
लिया
ज़िन्दगी
में
नया
हादसा
कर
लिया
देख
कर
वो
मुझे
पूछती
ही
रही
क्या
से
क्या
क्या
से
क्या
क्या
से
क्या
कर
लिया
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Shubham Tiwari
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है
सादगी
की
बात
तभी
तो
रुका
हूँ
मैं
वरना
हमारे
साथ
का
मुड़
कर
चला
गया
Shubham Tiwari
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