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Shubham Tiwari
ha
ha | हमें तो हिज्र ने ही मार डाला
- Shubham Tiwari
हमें
तो
हिज्र
ने
ही
मार
डाला
लटकता
रह
गया
फंदा
हमारा
- Shubham Tiwari
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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ये
सानिहा
भी
शब-ए-हिज्र
आ
पड़ा
हम
पर
तेरा
ख़्याल
तो
आया
तेरी
तलब
न
हुई
Subhan Asad
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कितना
आसाँ
था
तिरे
हिज्र
में
मरना
जानाँ
फिर
भी
इक
उम्र
लगी
जान
से
जाते
जाते
Ahmad Faraz
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आई
होगी
किसी
को
हिज्र
में
मौत
मुझ
को
तो
नींद
भी
नहीं
आती
Akbar Allahabadi
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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बोली
मेरा
हाथ
झटक
कर
मेरा
क़िस्सा
ठीक
नहीं
है
सारी
बातें
ठीक
हैं
लेकिन
इतना
ग़ुस्सा
ठीक
नहीं
है
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Shubham Tiwari
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हवा
ये
कह
रही
जलते
दियों
से
उदासी
को
जगा
मत
हिचकियों
से
Shubham Tiwari
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मुस्कुराने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
घर
सजाने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
ऐब
अपने
तो
सारे
मिटा
कर
के
मैं
गीत
गाने
लगा
हूँ
तुम्हारे
लिए
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Shubham Tiwari
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अजब
व्यापार
करने
लग
गया
हूँ
मैं
दो
का
चार
करने
लग
गया
हूँ
मैं
जिस
सेे
दोस्ती
करने
गया
था
उसी
से
प्यार
करने
लग
गया
हूँ
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Shubham Tiwari
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हमने
तुम्हारे
नाम
पे
क्या
क्या
नहीं
किया
सब
कुछ
सहा
है
प्यार
में
शिकवा
नहीं
किया
ये
और
बात
है
कि
हूँ
सब
सेे
उदास
मैं
लेकिन
किसी
भी
बात
पे
झगड़ा
नहीं
किया
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Shubham Tiwari
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