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Shoonya Shrey
zaraa sa kashmakash men hooñ zameen par dekhkar tujhko
zaraa sa kashmakash men hooñ zameen par dekhkar tujhko | ज़रा सा कश्मकश में हूँ ज़मीं पर देखकर तुझको
- Shoonya Shrey
ज़रा
सा
कश्मकश
में
हूँ
ज़मीं
पर
देखकर
तुझको
फ़लक
पर
यार
तुझको
तो
चमकना
चाहिए
था
ना
- Shoonya Shrey
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शब-ए-इंतिज़ार
की
कश्मकश
में
न
पूछ
कैसे
सहर
हुई
कभी
इक
चराग़
जला
दिया
कभी
इक
चराग़
बुझा
दिया
Majrooh Sultanpuri
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भोले
बन
कर
हाल
न
पूछ
बहते
हैं
अश्क
तो
बहने
दो
जिस
से
बढ़े
बेचैनी
दिल
की
ऐसी
तसल्ली
रहने
दो
Arzoo Lakhnavi
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उस
की
बेचैनी
बढ़ाना
चाहती
हूँ
सुनिए
कह
कर
चुप
लगाना
चाहती
हूँ
Pooja Bhatia
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तेरी
अंँगड़ाई
के
आलम
का
ख़याल
आया
जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ
में
खनकने
लगे
कंगन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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जाने
कैसी
कश्मकश
है
क्या
करूँँ
जी
में
आता
है
कि
दुनिया
फूँक
दूँ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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पलक
का
बाल
गिरे
कब
मैं
कब
तुझे
माँगूँ
मैं
कशमकश
में
ये
पलकें
न
नोच
लूँ
अपनी
Vishnu virat
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मेरी
बेचैनी
का
आलम
मेरी
बेचैनी
से
पूछो
मेरे
चहरे
से
पूछोगे
कहेगा
ठीक
है
सब
कुछ
Aqib khan
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अगर
हम
साथ
में
होते
तो
ये
होता
औ
वो
होता
ये
सबकुछ
भी
तभी
होता
अगर
हम
साथ
में
होते
Shoonya Shrey
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ग़ैर
नहीं
है
कोई
उसका
जान
लो
तुम
जिसकी
आँखों
में
देखे
वो
उसका
है
Shoonya Shrey
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सब
सेे
पहले
रखता
हूँ
मैं
तुमको
पर
तुम
सबको
मुझ
से
पहले
रख
देते
हो
Shoonya Shrey
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तू
वो
दरवाजा
जो
मुझ
सेे
खुला
नहीं
मैं
टूटी
खिड़की
सब
दिखता
है
भीतर
Shoonya Shrey
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बहुत
चर्चा
है
इस
ख़ालिस
विषय
का
मुहब्बत
नाम
है
याबिस
विषय
का
उधर
ग़म
का
ही
पेपर
लीक
निकला
मुझे
आता
था
सारा
जिस
विषय
का
बड़ा
दुख
दे
रही
है
ज़िंदगी
अब
बड़ा
मुश्किल
है
पर्चा
इस
विषय
का
जमा
इंसानियत
सिमटी
पड़ी
है
नहीं
मुद्दा
कहीं
मुफ़्लिस
विषय
का
उठा
रक्खो
ये
'शून्या'
शा'इरी
अब
लिए
फिरते
हो
ग़म
किस
किस
विषय
का
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Shoonya Shrey
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