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Shobhit Dixit
hamne ik vaham paal rakha hai
hamne ik vaham paal rakha hai | हमने इक वहम पाल रखा है
- Shobhit Dixit
हमने
इक
वहम
पाल
रखा
है
उसका
ही
तो
मलाल
रखा
है
टूटा
था
दिल
तो
एक
दफ़ा
बस
वो
दर्द
अब
तक
सम्हाल
रखा
है
- Shobhit Dixit
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आन
के
इस
बीमार
को
देखे
तुझको
भी
तौफ़ीक़
हुई
लब
पर
उसके
नाम
था
तेरा
जब
भी
दर्द
शदीद
हुआ
Ibn E Insha
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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चारासाज़ो
मिरा
इलाज
करो
आज
कुछ
दर्द
में
कमी
सी
है
Azhar Nawaz
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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इस
क़दर
जज़्ब
हो
गए
दोनों
दर्द
खेंचूँ
तो
दिल
निकल
आए
Abbas Qamar
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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मैं
शा'इर
हूँ
मोहब्बत
का
मिरे
दुख
भी
रसीले
हैं
Farhat Abbas Shah
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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तजरबा
जितना
बढ़ने
लगता
है
आईना
शक्लें
पढ़ने
लगता
है
Shobhit Dixit
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दिन-ब-दिन
तुम
ख़ूब-सूरत
हो
रही
हो
दिन-ब-दिन
हम
और
पागल
हो
रहे
हैं
Shobhit Dixit
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तेरी
ही
यादों
में
पाकीज़ा
होना
पड़ता
है
उसके
ख़ातिर
भी
इन
आँखों
को
रोना
पड़ता
है
तुमको
तो
बस
मेरे
ख़्वाबों
में
आना
होता
है
ये
सोचो
मुझको
तो
रातों
में
सोना
पड़ता
है
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Shobhit Dixit
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बाकी
है
तुमको
तुम
सेे
माँगे
जाना
वैसे
तो
शिव
से
भी
तुमको
माँगा
है
Shobhit Dixit
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लोग
हमको
भी
क्या
क्या
बताते
रहे
हम
भी
उनकी
ही
बातों
में
आते
रहे
एक
कहानी
अधूरी,
अधूरी
थी
बस
हम
थे
किरदार
नए,
नए
बनाते
रहे
नींद
होनी
थी
आँखों
की
अपनी
मगर
हम
तो
अपने
सपने
को
सुलाते
रहे
झूठी
थी
सब
क़स
में
बुनियाद
की
सो
झूठे
वादों
के
मलबे
उठाते
रहे
आने
वाले
तो
आते
रहे
उम्र
भर
जाने
वाले
जो
लोग
थे
जाते
रहे
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Shobhit Dixit
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