log hamko bhi kya kya bataate rahe | लोग हमको भी क्या क्या बताते रहे

  - Shobhit Dixit
लोगहमकोभीक्याक्याबतातेरहे
हमभीउनकीहीबातोंमेंआतेरहे
एककहानीअधूरी,अधूरीथीबस
हमथेकिरदारनए,नएबनातेरहे
नींदहोनीथीआँखोंकीअपनीमगर
हमतोअपनेसपनेकोसुलातेरहे
झूठीथीसबक़स
मेंबुनियादकी
सोझूठेवादोंकेमलबेउठातेरहे
आनेवालेतोआतेरहेउम्रभर
जानेवालेजोलोगथेजातेरहे
  - Shobhit Dixit
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