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Shivangi Shivi
kya ye mausam badlega
kya ye mausam badlega | क्या ये मौसम बदलेगा
- Shivangi Shivi
क्या
ये
मौसम
बदलेगा
क्या
ये
पत्थर
पिघलेगा
बिन
बादल
बरसातें
हैं
दिन
को
सूरज
निकलेगा
- Shivangi Shivi
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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रात
भर
ता'रीफ़
मैंने
की
तुम्हारे
रूप
की
चाँद
इतना
जल
गया
सुनकर
कि
सूरज
हो
गया
Chandan Rai
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मुझको
ऐसे
देख
रहा
हैरानी
में
जैसे
सूरज
देख
लिया
पेशानी
में
मैं
भी
उसको
देख
रहा
हूँ
कुछ
ऐसे
जैसे
सूरज
डूब
रहा
हो
पानी
में
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DEVANSH TIWARI
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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अगर
साए
से
जल
जाने
का
इतना
ख़ौफ़
था
तो
फिर
सहर
होते
ही
सूरज
की
निगहबानी
में
आ
जाते
Azm Shakri
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अभी
चाहिए
और
कितनी
बुलन्दी
कि
सहमा
है
सूरज
इमारत
के
पीछे
Kanha Mohit
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सूरज
सितारे
चाँद
मेरे
साथ
में
रहे
जब
तक
तुम्हारे
हाथ
मेरे
हाथ
में
रहे
Rahat Indori
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मैं
अपनी
दुनिया
का
ऐसा
सूरज
हूँ
जिस
सूरज
का
गहना
मुश्किल
होता
है
Aalok Shrivastav
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तेरे
होते
हुए
महफ़िल
में
जलाते
हैं
चराग़
लोग
क्या
सादा
हैं
सूरज
को
दिखाते
हैं
चराग़
Ahmad Faraz
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उरूज
पर
है
अज़ीज़ो
फ़साद
का
सूरज
जभी
तो
सूखती
जाती
हैं
प्यार
की
झीलें
Nami Nadri
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ताबीरों
को
ताबानी
दे
मौला
इस
शायर
को
नादानी
दे
मौला
Shivangi Shivi
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आज
समाँ
कुछ
ऐसा
है
पिछले
बरसों
जैसा
है
ख़ूब
बहुत
है
बाहरस
जाने
ये
दिल
कैसा
है
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Shivangi Shivi
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कितनी
तेज़
हवाए
हैं
फिर
भी
दिए
जलाए
हैं
तारे
क्या
आसमान
से
हम
चाँद
तोड़
लाए
हैं
इन
आँखों
में
देखो
तो
कितने
ख़्वाब
समाए
हैं
दिल
के
दरीचे
पे
हमने
थोड़े
दिए
जलाए
हैं
इन
काँटों
की
राहों
में
हमने
फूल
बिछाए
हैं
ख़्वाबों
की
ताबीरों
को
पलकों
तले
छुपाए
हैं
इस
दिल
के
इक
कोने
में
कितने
दर्द
छुपाए
हैं
दूर
से
देखो
बादल
तो
पर्बत
से
टकराए
हैं
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Shivangi Shivi
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नाम
तुम्हारा
लेते
हैं
जो
काम
हमारा
हो
जाता
है
Shivangi Shivi
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पतझड़
को
तो
आना
था
सावन
को
भी
जाना
था
फूल
बड़े
ही
सुंदर
थे
मौसम
बड़ा
सुहाना
था
पानी
जमकर
बरसा
था
बादल
तिरा
दिवाना
था
धूल
जमी
थी
सूरत
में
आईना
अनजाना
था
बात
चली
थी
लंबी
कुछ
क़िस्सा
बड़ा
पुराना
था
करना
पड़ा
बड़ा
दिल
को
उसका
यही
ठिकाना
था
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Shivangi Shivi
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