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Shiva awasthi
zindagi ilm ka panna nahin hai
zindagi ilm ka panna nahin hai | ज़िंदगी इल्म का पन्ना नहीं है
- Shiva awasthi
ज़िंदगी
इल्म
का
पन्ना
नहीं
है
ज़िंदगी
बस
सुकूँ
का
मसअला
है
- Shiva awasthi
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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एक
आवाज़
पे
आ
जाती
है
दौड़ी
दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान
नहीं
देखती
है
दोस्ती
दोस्ती
होती
है
तुम्हें
इल्म
नहीं
दोस्ती
फ़ाइदा
नुक़सान
नहीं
देखती
है
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Aadil Rasheed
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ये
हुनर
रब
ने
मेरी
ज़ात
में
रक्खा
हुआ
है
अच्छे
अच्छो
को
भी
औक़ात
में
रक्खा
हुआ
है
Fareeha Naqvi
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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ये
इल्म
का
सौदा
ये
रिसाले
ये
किताबें
इक
शख़्स
की
यादों
को
भुलाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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अशआ'र
मिरे
यूँँ
तो
ज़माने
के
लिए
हैं
कुछ
शे'र
फ़क़त
उन
को
सुनाने
के
लिए
हैं
ये
इल्म
का
सौदा
ये
रिसाले
ये
किताबें
इक
शख़्स
की
यादों
को
भुलाने
के
लिए
हैं
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Jaan Nisar Akhtar
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सिर्फ़
तालीम
है
वो
शय
यारों
जिस
सेे
ज़िंदा
चराग़
जलते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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रक़ीब
आकर
बताते
हैं
यहाँ
तिल
है
वहाँ
तिल
है
हमें
ये
जानकारी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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आँखों
की
नम
अलमारी
में
रक्खे
रक्खे
ख़्वाबों
की
ज़िल्दें
सीलन
से
भीग
गईं
हैं
Shiva awasthi
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प्यार
यक़ीनन
निकला
होगा
सागर
को
मथने
ही
से
वरना
खारे
ऑंसू
पीकर
कौन
सा
पौधा
बढ़ता
है
Shiva awasthi
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जिन
की
मीठी
चहकन
सुनकर
मेरा
दिन
पूरा
होता
था
अब
उन
चिड़ियों
की
आहट
को
जैसे
कान
तरस
जाते
हैं
Shiva awasthi
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गला
ही
घोंट
डालूँगी
किसी
दिन,
मैं
अपने
आप
से
उकता
गई
हूँ
Shiva awasthi
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फलाँ
लड़की
फलाँ
इंसाँ
या
आदमी
की
तरह
मैंने
बनना
नहीं
चाहा
कभी
किसी
की
तरह
Shiva awasthi
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