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Shiva awasthi
jin ki meethi chahkan sunkar meraa din poora hota tha
jin ki meethi chahkan sunkar meraa din poora hota tha | जिन की मीठी चहकन सुनकर मेरा दिन पूरा होता था
- Shiva awasthi
जिन
की
मीठी
चहकन
सुनकर
मेरा
दिन
पूरा
होता
था
अब
उन
चिड़ियों
की
आहट
को
जैसे
कान
तरस
जाते
हैं
- Shiva awasthi
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बहुत
पहले
से
उन
क़दमों
की
आहट
जान
लेते
हैं
तुझे
ऐ
ज़िंदगी
हम
दूर
से
पहचान
लेते
हैं
Firaq Gorakhpuri
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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दे
रहे
हैं
लोग
मेरे
दिल
पे
दस्तक
बार
बार
दिल
मगर
ये
कह
रहा
है
सिर्फ़
तू
और
सिर्फ़
तू
Fareeha Naqvi
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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अब
तो
चुप-चाप
शाम
आती
है
पहले
चिड़ियों
के
शोर
होते
थे
Mohammad Alvi
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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जहाँ
पहुँच
के
क़दम
डगमगाए
हैं
सब
के
उसी
मक़ाम
से
अब
अपना
रास्ता
होगा
Aabid Adeeb
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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जब
फागुन
रंग
झमकते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
और
दफ़
के
शोर
खड़कते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
Nazeer Akbarabadi
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शायर
नए
नए
हो
तुमको
इसका
बिल्कुल
इल्म
नहीं
दुनियादारी
और
शा'इरी
साथ
नहीं
चल
सकती
है
Shiva awasthi
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कहीं
पर
दिल
किसी
का
जल
रहा
है
कहीं
सिगरेट
जलाई
जा
रही
है
Shiva awasthi
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तुम्हारी
याद
आती
है,
भला
तुम
सेे
बताऊँ
क्यूँ
?
अगर
ये
भी
नहीं
समझे,
तो
फिर
क्या
ख़ाक
समझे
हो
Shiva awasthi
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कल
मेले
में
हँस
कर
मुझ
सेे
एक
खिलौने
वाला
बोला
सब
के
बच्चे
खेलेंगे
तो
मेरे
बच्चे
खा
पाएँगे
Shiva awasthi
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मेरे
ज़खीरे
में
हैं
बेशुमार
तस्वीरें
कमाल
ये
है
कि
आँखों
में
रौशनी
ही
नहीं
Shiva awasthi
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