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Shiva awasthi
mere qareeb tha magar aañsu nahin dikhe
mere qareeb tha magar aañsu nahin dikhe | मेरे क़रीब था मगर आँसू नहीं दिखे
- Shiva awasthi
मेरे
क़रीब
था
मगर
आँसू
नहीं
दिखे
इतना
बदल
गया
मेरा
दर्पण
अजीब
है
- Shiva awasthi
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मेरे
आँसू
नहीं
थम
रहे
कि
वो
मुझ
सेे
जुदा
हो
गया
और
तुम
कह
रहे
हो
कि
छोड़ो
अब
ऐसा
भी
क्या
हो
गया
मय-कदों
में
मेरी
लाइनें
पढ़ते
फिरते
हैं
लोग
मैंने
जो
कुछ
भी
पी
कर
कहा
फ़लसफ़ा
हो
गया
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Tehzeeb Hafi
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न
रूई
हो
तो
अपने
अश्कों
से
बाती
बनाएँगे
बुझा
दीया
हमारा
तो
हवा
से
लड़
भी
जाएँगे
बनाई
रोज़
चौदह
साल
रंगोली
बस
इस
ख़ातिर
न
जाने
रामजी
वनवास
से
कब
लौट
आएंँगे
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Krishnakant Kabk
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आँसू
पोंछ
के
हँस
देता
है
आग
में
आग
लगाने
वाला
Arzoo Lakhnavi
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उन
के
रुख़्सार
पे
ढलके
हुए
आँसू
तौबा
मैंने
शबनम
को
भी
शोलों
पे
मचलते
देखा
Sahir Ludhianvi
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चुपके
चुपके
रात
दिन
आँसू
बहाना
याद
है
हम
को
अब
तक
आशिक़ी
का
वो
ज़माना
याद
है
Hasrat Mohani
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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मैं
इस
लिए
भी
तेरे
फ़न
की
क़द्र
करता
हूँ
तू
झूठ
बोल
के
आँसू
निकाल
लेता
है
Ahmad Kamal Parvazi
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मैं
इस
ख़याल
से
जाते
हुए
उसे
न
मिला
कि
रोक
लें
न
कहीं
सामने
खड़े
आँसू
Jawwad Sheikh
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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तेरी
यादों
में
निकले
अश्क़
भी
ज़ाया'
नहीं
जाते
मैं
आँसू
पोछ
करके
आस्तीं
को
चूम
लेता
हूँ
Shabab Shahzad Khan
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एक
टॉफ़ी,
चार
चूड़ी,
एक
बिंदी,
चंद
फूल
और
कुछ
इस
सेे
अधिक
माँगा
हो
तुम
सेे
तो
कहो
Shiva awasthi
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ये
किस
का
अक्स
है
हर
सू
समाया
छुपा
है
कौन
मेरी
पुतलियों
में
Shiva awasthi
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तुम्हारी
याद
आती
है,
भला
तुम
सेे
बताऊँ
क्यूँ
?
अगर
ये
भी
नहीं
समझे,
तो
फिर
क्या
ख़ाक
समझे
हो
Shiva awasthi
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खो
गए
खेलते
बच्चे
की
तरह
वक़्त
की
भीड़
में
लम्हात
मेरे
Shiva awasthi
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पर
सजा
के
मैं
उसके
रखता
हूँ
जिस
कबूतर
को
तुम
ने
चूमा
था
Shiva awasthi
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