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shaan manral
ye ghazal nazm kaise kahtaa main
ye ghazal nazm kaise kahtaa main | ये ग़ज़ल नज़्म कैसे कहता मैं
- shaan manral
ये
ग़ज़ल
नज़्म
कैसे
कहता
मैं
जो
मोहब्बत
हुई
नहीं
होती
- shaan manral
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अदावत
मुहब्बत
रफ़ाक़त
नहीं
है
हमें
तुम
सेे
कोई
शिकायत
नहीं
है
दिलों
को
लगाने
लगे
हो
जहाँँ
तुम
वहाँ
तो
किसी
को
मुहब्बत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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सँभलने
के
लिए
कर
ली
मुहब्बत
मगर
इस
में
फिसलना
चाहिए
था
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Divy Kamaldhwaj
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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सच
बताओ
कि
सच
यही
है
क्या
साँस
लेना
ही
ज़िंदगी
है
क्या
कुछ
नया
काम
कर
नई
लड़की
इश्क़
करना
है
बावली
है
क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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इस
आँख
से
दो
अश्क
छलक
भी
गए
तो
क्या
रोना
तो
ब-ज़ाहिर
मिरा
किरदार
नहीं
है
shaan manral
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साहब
मेरे
को
इतनी
तवज्जोह
तो
दीजिए
जो
पीठ
पीछे
आप
की
इज़्ज़त
भी
कर
सकूँ
shaan manral
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कभी
भी
ज़िंदगी
में
ग़म
मिले
तो
हँस
के
सह
लेना
कोई
नायाब
सी
बख़्शीश
ठुकराया
नहीं
करते
shaan manral
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जो
ज़िंदगी
से
चाहता
था
मिल
गया
मुझे
फिर
भी
मुझे
सुकून
मुयस्सर
नहीं
हुआ
shaan manral
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शहर
में
आज
हादसा
हो
गया
इक
भला
आदमी
बुरा
हो
गया
आइने
में
अभी
अभी
ख़ुद
को
देख
ख़ूब
रोया
कि
क्या
था
क्या
हो
गया
मैं
तिरे
साथ
चल
रहा
था
और
फिर
मिरे
साथ
हादसा
हो
गया
आप
ही
ठीक
हो
ग़लत
मैं
हूँ
कितनी
जल्दी
ये
फ़ैसला
हो
गया
हम
तो
इंसान
भी
न
बन
पाए
आज
फिर
एक
बुत
ख़ुदा
हो
गया
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shaan manral
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