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shaan manral
kabhi bhi zindagi men gham mile to hañs ke sah lena
kabhi bhi zindagi men gham mile to hañs ke sah lena | कभी भी ज़िंदगी में ग़म मिले तो हँस के सह लेना
- shaan manral
कभी
भी
ज़िंदगी
में
ग़म
मिले
तो
हँस
के
सह
लेना
कोई
नायाब
सी
बख़्शीश
ठुकराया
नहीं
करते
- shaan manral
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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तू
तो
वाक़िफ़
है
रिवाज़-ए-ग़म
से
इसके
इश्क़
तो
तेरा
भी
ये
पहला
नहीं
है
Siddharth Saaz
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मज़ाक
सहना
नहीं
है
हँसी
नहीं
करनी
उदास
रहने
में
कोई
कमी
नहीं
करनी
Swapnil Tiwari
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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ग़म
के
पीछे
मारे
मारे
फिरना
क्या
ये
दौलत
तो
घर
बैठे
आ
जाती
है
Shakeel Jamali
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आँख
में
नम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
उसके
ग़म
तक
आ
पहुँचा
हूँ
पहली
बार
मुहब्बत
की
थी
आख़री
दम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ये
तय
है
कि
उसे
मैं
हरगिज़
भूल
नहीं
पाऊँगा
पर
अपने
लोगों
को
समझा
सकता
हूँ
कि
उस
का
ज़िक्र
न
हो
shaan manral
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ज़र
से
परे
बस
एक
दु'आ
ढूँढते
हुए
आया
मरीज़-ए-इश्क़
दवा
ढूँढते
हुए
shaan manral
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उस
पे
यक़ीं
न
करते
हुए
भी
करेंगे
सब
मासूम
शक्ल
से
जो
कहानी
बताएगी
shaan manral
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सच
की
परतें
जो
खुलेंगी
तो
छुपायेगा
मुँह
झूठ
पे
झूठ
ज़रूरत
से
ज़ियादा
मत
बोल
shaan manral
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ग़मों
का
एक
दफ़्तर
देख
लेना
यक़ीनन
मेरे
अंदर
देख
लेना
तुम्हें
ईंटों
पे
ग़म
चिपके
मिलेंगे
कोई
वीरान
सा
घर
देख
लेना
जो
तन्हा
एक
पैकर
देखना
हो
हमें
ही
तुम
बराबर
देख
लेना
किसी
दिन
सूख
जाएगा
यक़ीनन
हमारे
दुख
का
सागर
देख
लेना
तेरे
एहसास
की
गर्मी
मिलेगी
मेरे
तन-मन
को
छू
कर
देख
लेना
तुम्हें
पीछे
से
हम
आवाज़
देंगे
अगर
चाहो
तो
मुड़
कर
देख
लेना
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shaan manral
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