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shaan manral
ishq hai dard bhi ruswaai bhi
ishq hai dard bhi ruswaai bhi | इश्क़ है दर्द भी रुसवाई भी
- shaan manral
इश्क़
है
दर्द
भी
रुसवाई
भी
ये
ज़रा
सा
है
तमाशाई
भी
ये
मोहब्बत
तो
अता
करती
है
जान-ए-जाँ
थोड़ी
सी
तन्हाई
भी
तेरी
आहट
है
अभी
तक
ज़िंदा
सच
है
लेकिन
है
ये
दुख-दाई
भी
बस
ख़ुशी
की
ही
तमन्नाई
क्यूँँ
थोड़े
दुख
की
हो
पज़ीराई
भी
आ
कभी
तू
मिरे
दर
पे
वर्ना
रूठ
जायेगी
ये
बीनाई
भी
- shaan manral
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आँख
में
नम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
उसके
ग़म
तक
आ
पहुँचा
हूँ
पहली
बार
मुहब्बत
की
थी
आख़री
दम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
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Khalil Ur Rehman Qamar
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मेरी
बरसों
की
उदासी
का
सिला
कुछ
तो
मिले
उस
से
कह
दो
वो
मेरा
क़र्ज़
चुकाने
आए
Khalil Ur Rehman Qamar
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शिकस्ता
दिल
शब-ए-ग़म
दर्द
रुसवाई
अरे
इतना
तो
चलता
है
मुहब्बत
में
Sapna Moolchandani
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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तू
भी
कब
मेरे
मुताबिक
मुझे
दुख
दे
पाया
किस
ने
भरना
था
ये
पैमाना
अगर
ख़ाली
था
एक
दुख
ये
कि
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
है
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
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Tehzeeb Hafi
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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बहुत
से
ग़म
समेट
कर
बनाई
एक
डायरी
चुवाव
देख
रात
भर
बनाई
एक
डायरी
ये
हर्फ़
हर्फ़
लफ़्ज़
लफ़्ज़
क़ब्र
है
वरक़
वरक़
दिल-ए-हज़ीं
से
इस
क़दर
बनाई
एक
डायरी
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Aves Sayyad
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आगही
बढ़ने
लगी
है
ख़ामुशी
बढ़ने
लगी
है
दिल-लगी
बढ़ने
लगी
है
हर
ख़ुशी
बढ़ने
लगी
है
रू-ब-रू
तुम
जो
हुए
तो
शा'इरी
बढ़ने
लगी
है
दोस्तों
से
अब
हमारी
दुश्मनी
बढ़ने
लगी
है
आप
बैठे
तख़्त
पर
और
रहज़नी
बढ़ने
लगी
है
नौकरी
लगती
नहीं
और
उम्र
भी
बढ़ने
लगी
है
धीरे
धीरे
ही
सही
पर
आशिक़ी
बढ़ने
लगी
है
इक
कमी
के
वास्ते
आज
हर
कमी
बढ़ने
लगी
है
सुब्ह
की
उम्मीद
में
और
तीरगी
बढ़ने
लगी
है
राह
तकते
तकते
गोया
बेकली
बढ़ने
लगी
है
रोग
भी
बढ़ने
लगा
और
बे-ख़ुदी
बढ़ने
लगी
है
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shaan manral
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न
कोई
रंग
न
कोई
भी
रूप
था
उस
का
अजब
एहसास
हुआ
था
हमें
बहुत
पहले
shaan manral
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ये
तुम
भी
जानते
हो
कि
हालात
नर्म
है
कहने
को
कह
रहा
हूँ
कि
सब
ठीक
ठाक
है
shaan manral
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वो
पहले-पहल
दुख
बहुत
ही
हुआ
था
कि
मुझ
को
कोई
कुछ
समझता
नहीं
है
shaan manral
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दौलत
के
साथ
मुफ़्त
में
आती
है
दुश्मनी
मैं
इसलिए
भी
रहता
हूँ
मनहूस
धन
से
दूर
shaan manral
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