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shaan manral
aagahi badhne lagii hai
aagahi badhne lagii hai | आगही बढ़ने लगी है
- shaan manral
आगही
बढ़ने
लगी
है
ख़ामुशी
बढ़ने
लगी
है
दिल-लगी
बढ़ने
लगी
है
हर
ख़ुशी
बढ़ने
लगी
है
रू-ब-रू
तुम
जो
हुए
तो
शा'इरी
बढ़ने
लगी
है
दोस्तों
से
अब
हमारी
दुश्मनी
बढ़ने
लगी
है
आप
बैठे
तख़्त
पर
और
रहज़नी
बढ़ने
लगी
है
नौकरी
लगती
नहीं
और
उम्र
भी
बढ़ने
लगी
है
धीरे
धीरे
ही
सही
पर
आशिक़ी
बढ़ने
लगी
है
इक
कमी
के
वास्ते
आज
हर
कमी
बढ़ने
लगी
है
सुब्ह
की
उम्मीद
में
और
तीरगी
बढ़ने
लगी
है
राह
तकते
तकते
गोया
बेकली
बढ़ने
लगी
है
रोग
भी
बढ़ने
लगा
और
बे-ख़ुदी
बढ़ने
लगी
है
- shaan manral
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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झिझकता
हूँ
उसे
इल्ज़ाम
देते
कोई
उम्मीद
अब
भी
रोकती
है
Shariq Kaifi
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हम
हैं
रहे-उम्मीद
से
बिल्कुल
परे
परे
अब
इंतज़ार
आपका
कोई
करे!
करे!
मैंने
तो
यूँँ
ही
अपनी
तबीयत
सुनाई
थी
तुम
तो
लगीं
सफाइयाँ
देने,
अरे!
अरे!
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Balmohan Pandey
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जानता
हूँ
कि
हवाएँ
तुझे
बहकाती
हैं
जा
चराग़ों
की
तरह
तू
भी
उजाला
कर
दे
ATUL SINGH
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एक
भी
उम्मीद
की
चिट्ठी
इधर
आती
नहीं
हो
न
हो
अपने
समय
का
डाकिया
बीमार
है
Kunwar Bechain
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न
जाने
किस
लिए
उम्मीद-वार
बैठा
हूँ
इक
ऐसी
राह
पे
जो
तेरी
रहगुज़र
भी
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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कई
दिनों
से
अँधेरों
का
बोलबाला
है
चराग़
ले
के
पुकारो
कहाँ
उजाला
है
Rahat Indori
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न
कोई
वा'दा
न
कोई
यक़ीं
न
कोई
उमीद
मगर
हमें
तो
तिरा
इंतिज़ार
करना
था
Firaq Gorakhpuri
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किसी
से
कोई
भी
उम्मीद
रखना
छोड़
कर
देखो
तो
ये
रिश्ते
निभाना
किस
क़दर
आसान
हो
जाए
Waseem Barelvi
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हर
रात
इक
चराग़
जलाना
पड़ा
मुझे
ये
रस्म-
ए-
इंतिज़ार
निभाना
पड़ा
मुझे
shaan manral
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तस्वीर
अर्से
बाद
बदलती
है
सब्र
रख
ऐसा
नहीं
न
होता
कि
सोचा
बदल
गया
shaan manral
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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इश्क़
है
दर्द
भी
रुसवाई
भी
ये
ज़रा
सा
है
तमाशाई
भी
ये
मोहब्बत
तो
अता
करती
है
जान-ए-जाँ
थोड़ी
सी
तन्हाई
भी
तेरी
आहट
है
अभी
तक
ज़िंदा
सच
है
लेकिन
है
ये
दुख-दाई
भी
बस
ख़ुशी
की
ही
तमन्नाई
क्यूँँ
थोड़े
दुख
की
हो
पज़ीराई
भी
आ
कभी
तू
मिरे
दर
पे
वर्ना
रूठ
जायेगी
ये
बीनाई
भी
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shaan manral
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जितना
हमें
दिया
गया
उतना
तो
कम
नहीं
कुछ
छूट
भी
गया
तो
हमें
उस
का
ग़म
नहीं
मैं
कितना
संग-दिल
हूँ
ये
तो
और
बात
है
वो
ख़ुश
है
इसलिए
भी
मिरी
आँख
नम
नहीं
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shaan manral
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