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shaan manral
har raat ik charaaghh jalana pada mujhe
har raat ik charaaghh jalana pada mujhe | हर रात इक चराग़ जलाना पड़ा मुझे
- shaan manral
हर
रात
इक
चराग़
जलाना
पड़ा
मुझे
ये
रस्म-
ए-
इंतिज़ार
निभाना
पड़ा
मुझे
- shaan manral
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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प्यार
की
रात
हो
छत
पर
हो
तेरा
साथ
तो
फिर
चाँद
को
बीच
में
डाला
नहीं
जाता
मुझ
सेे
Waseem Barelvi
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खुलती
है
मेरी
नींद
हर
इक
रात
दो
बजे
इक
रात
दो
बजे
मुझे
छोड़ा
था
आपने
Tanoj Dadhich
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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उस
के
ख़त
रात
भर
यूँँ
पढ़ता
हूँ
जैसे
कल
इम्तिहान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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हाल
मीठे
फलों
का
मत
पूछो
रात
दिन
चाकूओं
में
रहते
हैं
Fahmi Badayuni
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कितना
यक़ीन
था
तुम
पे
जान-ए-जाँ
हमारा
वो
मान
वो
भरम
सब
मिस्मार
हो
गया
है
shaan manral
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ग़मों
का
एक
दफ़्तर
देख
लेना
यक़ीनन
मेरे
अंदर
देख
लेना
तुम्हें
ईंटों
पे
ग़म
चिपके
मिलेंगे
कोई
वीरान
सा
घर
देख
लेना
जो
तन्हा
एक
पैकर
देखना
हो
हमें
ही
तुम
बराबर
देख
लेना
किसी
दिन
सूख
जाएगा
यक़ीनन
हमारे
दुख
का
सागर
देख
लेना
तेरे
एहसास
की
गर्मी
मिलेगी
मेरे
तन-मन
को
छू
कर
देख
लेना
तुम्हें
पीछे
से
हम
आवाज़
देंगे
अगर
चाहो
तो
मुड़
कर
देख
लेना
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shaan manral
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जी
चाहता
है
एक
यही
काम
करने
को
मैं
अपने
दिल
का
हाल
ग़ज़ल
में
समेट
लूँ
वैसे
तुम्हारे
बारे
में
क्या
सोचता
हूँ
मैं
कह
दो
तो
वो
ख़याल
ग़ज़ल
में
समेट
लूँ
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shaan manral
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दर्द
से
दामन
छुड़ाना
आ
गया
या'नी
फिर
से
मुस्कुराना
आ
गया
आप
हासिल
हैं
जिसे
ऐ
दिल-नशीं
हाथ
में
उस
के
ख़ज़ाना
आ
गया
आप
के
तेवर
बदल
ही
जाएँगे
चंद
पैसे
जो
कमाना
आ
गया
आप
तो
मासूम
लगते
हैं
बहुत
कैसे
फिर
दिल
ये
दुखाना
आ
गया
देखिए
मेरा
सफ़र
तो
ख़त्म
है
अब
फ़क़त
मेरा
ठिकाना
आ
गया
बाप
के
आराम
के
दिन
आ
गए
बेटे
को
आख़िर
कमाना
आ
गया
आपका
आँचल
मिला
है
धूप
में
आज
सर
पे
शामियाना
आ
गया
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shaan manral
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चेहरे
के
साथ
मुरझा
गया
ये
गुलाब
भी
जो
उस
ने
देख
कर
के
भी
देखा
नहीं
मुझे
shaan manral
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