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shaan manral
daulat ke saath muft men aati hai dushmani
daulat ke saath muft men aati hai dushmani | दौलत के साथ मुफ़्त में आती है दुश्मनी
- shaan manral
दौलत
के
साथ
मुफ़्त
में
आती
है
दुश्मनी
मैं
इसलिए
भी
रहता
हूँ
मनहूस
धन
से
दूर
- shaan manral
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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ज़रा
मौसम
तो
बदला
है
मगर
पेड़ों
की
शाख़ों
पर
नए
पत्तों
के
आने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
बहुत
से
ज़र्द
चेहरों
पर
ग़ुबार-ए-ग़म
है
कम
बे-शक
पर
उन
को
मुस्कुराने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
Javed Akhtar
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ऐसे
तेवर
दुश्मन
ही
के
होते
हैं
पता
करो
ये
लड़की
किस
की
बेटी
है
Zia Mazkoor
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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तुम
सेे
जो
मिला
हूँ
तो
मेरा
हाल
है
बदला
पतझड़
में
भी
जैसे
के
कोई
फूल
खिला
हो
Haider Khan
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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उँगली
हमारी
तुम
से
न
पकड़ी
गई
कभी
फिर
भी
तुम्हारे
नाज़
उठाए
फिरे
हैं
हम
shaan manral
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बरसों
से
ही
रहना
कोई
दश्त
में
होता
है
फिर
भी
जाने
दिल
में
फ़स्ल-ए-गुल
का
मौसम
क्यूँँ
shaan manral
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आप
नाहक़
ही
ज़ुल्म
ढाते
हैं
और
हम
हैं
कि
मुस्कुराते
हैं
तीर
पे
तीर
छोड़ते
हैं
आप
फिर
जिगर
को
भी
आज़माते
हैं
आप
हैं
ला-जवाब
शा'इर
दोस्त
हर
किसी
को
पसंद
आते
हैं
मौसमों
की
ललक
में
क्या
रोना
ये
तो
आते
हैं
और
जाते
हैं
ज़ख़्म
तो
भर
गए
सभी
ऐ
दिल
चल
नया
एक
ज़ख़्म
खाते
हैं
पाप
का
मैल
मन
से
धोने
को
लोग
गंगा
में
जा
नहाते
हैं
ये
कहानी
भी
ख़ूब
है
अपनी
आँख
में
अश्क
झिलमिलाते
हैं
काम
कितने
ही
रह
गए
बाक़ी
आप
'शेखर'
ग़ज़ल
सुनाते
हैं
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shaan manral
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फिर
उसी
ने
डुबो
दिया
मुझ
को
जिस
ने
मुझ
को
कभी
बचाया
था
shaan manral
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ज़िक्र
उठा
जब
तेरा
सब
यादों
की
परतें
खुलती
गई
और
मैं
मान
रहा
था
सालों
से
कि
तुझे
मैं
भूल
गया
shaan manral
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